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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 286 में से

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पृष्ठ 80

६ तृतीय प्रभाव ८१
भावार्थ—(सखी की उक्ति नायक से) आपने बरबस उसे (नायिका को)
सुख देकर (सुख की सामग्रियाँ जुटाकर), सखियों को मध्यस्थ बनाकर, शपथ
खाकर, कुछ नशीली वस्तुएँ खिलाकर तथा सुलाकर अपने वश में किया ।
फिर कमलनाल सी कोमल एवम् बेले की माला की भाँति (सुकुमार एवम्
सुगंध ) वाला को मसल डाला । आप मनुष्य हैं या पशु ? (क्योंकि आपके
कर्म कठोर हैं, निर्दयतापूर्ण हैं) आपको अभी तक यही पता नहीं चला कि
प्रभात हो गया है (अभी तक आपने उसे मुक्त नहीं किया) । मेरी बात ही
नहीं सुन रहे हैं। जरा इसके शरीर को तो देखिए, जान पड़ता है प्राण निकल
से गए हैं। उस चित्रिनी (नायिका) को आपने विचित्र गति (ढंग) से
रखा है, वह तो चित्र-सी (स्थिर निर्जीव) हो गई है। हे नए रसिक, देखते
क्यों नहीं ? आपको ऐसा कृत्य करने में कौन-सा आनंद मिला ?
अलंकार—विषम ।
मुग्धा को मान— ( दोहा )
(७६) मुग्धा मान करै नहीं, करै तौ सुनहु सुजान ।
त्यों डरपाइ छुड़ाइयै, ज्यों डरपै अज्ञान ।३०।
शब्दार्थ—डरपाइ = भयभीत करक ।
यथा— ( सवैया )
(७७) बोलै न बाल बुलावतहूँ नख-रेख लिखै भुव प्रेम-परेखौ ।
आपनो हाथ बिलोकि-बिलोकि कह्यो तब केसव बुद्धिबिसेखौ ।
छोटी-बड़ी बिधि-रेख लिखी जुग आयु की रेख सुं कौन जु लेखौ ।
प्रेम तें बोल सह्यो न पर्यो अकुलाइ कह्यो पिय कैसी है देखौ ।३१।
शब्दार्थ—वाल = नायिका । भुव = भूमि । प्रेम-परेखौ = प्रेम की परीक्षा
में, प्रेम के मान में । बुद्धिबिसेखौ = विशेषबुद्धिवाले (नायक) ने । बिधि =
ब्रह्मा । जुग = दो । सु = वह । लेखै = समझी जाए । देखौ = देखा जाए ।
भावार्थ—(मुग्धा ने सखियों के कहने से मान किया है, नायक चतुराई
से उसे भयभीत करके मान छुड़ा रहा है) नायिका (नायक के) बुलाने पर
भी नहीं बोलती, प्रेम का मान ठानकर नखों से पृथ्वी पर रेखाएँ खींच रही
है। यह देखकर चतुर नायक ने अपना हाथ देख-देखकर यह कहना आरंभ
किया कि ब्रह्मा ने छोटी-बड़ी दो रेखाएँ बनाई हैं। इनमें आयु की रेखा कौन
सी मानी जाय ? प्रेम के कारण नायिका इन वचनों को सह न सकी (वह
डर गई कि कहीं आयु की रेखा छोटी ही न हो, नायक की आयु कम ही न
३०—करै-करहि । सुनहु०-सुनौ-निदान । त्यों-यों न्यों । ३१-परेखौ,
लेखौ आदि-परेखें, लेखें आदि ।