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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 286 में से

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पृष्ठ 159

१६१ रसिकप्रिया
चँवर चलाव जिन बीजन हलाव मति,
केसव सुगंध बाय बाय-सी लगति है।
चंदन चढ़ाव जिन ताप सी चढ़ति तन,
कुंकुम न लाव अंग आग सी लगति है।
बार बार बरजत बाबरी है वारौं आनि,
बीरी न खवाव बीर बिष सी लगति है ।४।
शब्दार्थ- सूल फूलत = काँटे की तरह कसकते हैं, पीड़ा बढ़ती है। दूरि
करि = हटा दे । बाल = बाला, स्त्री । ब्याल = सर्प । बालब्याल = सर्पिणी,
नागिन । चँवर = मुछल । जिन = मत, नहीं । बीजन = (सं० व्यजन)
पंखा । मति = मत, नहीं । सुगंध बाय = सुगंधित वायु, सुगंधित पदार्थों के
संस्पर्श से सुगंधित होकर आनेवाली वायु । बाय = बाई (व्याधि) ।
ताप = ज्वर । 'ताप' शब्द का स्त्रीलिंग में व्यवहार ज्वर अर्थ में होता है ।
कुंकुम = केसर । न लाउ = मत लगा । अंग = शरीर में । बाबरी = पगली,
मूर्ख । वारों = बलिहार होती हूँ । आनि = आकर । बीरी = पान की
गिलौरी । बीर = हे सखी ।
श्रीराधिकाजू को प्रकाश पूर्वानुराग, यथा-(सवैया)
(२८६) केसव कसहूँ ईठनि डीठि ह्वै डीठ परे रति-ईठ कन्हाई।
ता दिन तें मन मेरे को आनि भई सु भई कहि क्योंहूँ न जाई ।
होइगी हाँसी जौ आवै कहूँ कहि, जानि हितू हित बूझन आई।
कैसे मिलौं री, मिले बिनु क्यों रहौं, नैननि हेत, हियें डर माई ।५।
शब्दार्थ - कैसहूँ = किसी प्रकार से । ईठनि = यत्नों से डीठि । ह्वै डीठ
परे = दृष्टि द्वारा देखे गए, ध्यान देकर उनका रूप देखा । रति-ईठ = प्रेम के
लिए इष्ट, प्रिय । कन्हाई = कृष्ण । आनि० = (मेरे मन पर) जो आ पड़ी
वह किसी प्रकार कही नहीं जा सकती । होइगी० = यदि कहीं कोई बात मुँह
से निकल गई तो मेरा उपहास होगा। हितू = हितैषिणी । हित = पथ्य,
अनुकूल कार्य अर्थात् उपाय । बूझन = पूछने के लिए । हेत = प्रेम । हियें =
हृदय में । माई = हे सखी ।
श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न पूर्वानुराग, यथा-( सवैया)
(२८७) एक समै बृषभानसुता सजनी-गन में जननी-सँग बैसी ।
जात उन्हें चितयो जिहिं रीति सु प्रीति हियें कहि जाइ न तैसी ।
४-फूलत-सूलति । मान बाल०-माला बाला ब्याल, मार ब्याल बाल ।
मति-लागै । ताप०--ताप सों तचति । ५-डीठि ह्वै-ईठि ते । परे--परेख ।
कन्हाई-कहाई । कहूँ-कछु !