रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६० ) रसेन्द्रसारसंग्रह ।
दूसरी विधि-सिंगरफको भेडके दूधमें सात भावना देकर सुखा ले
फिर नींबू आदि अम्ल वर्गके रसमें सात भावना देकर सुखा ले तो
सिंगरफ निश्चय ही शुद्ध होजाता है ॥ ३७ ॥
दरदं दोलिकायन्त्रे पक्वं जंबीरजैर्द्रवैः ।
सप्तवारमजामूत्रैर्भावितं शुद्धिमेति हि ॥ ३८ ॥
तीसरी विधि-सिंगरफके टुकड़ोंको कपडेमें बांध दोलायंत्रद्वारा
जंबीरीके रसमें एक दिन पकावे फिर निकालकर बकरीके मूत्रमें
सात भावना देवे ( रगड़कर सुखावे ) तो शुद्धताको प्राप्त हो निर्दोष
होजाता है ॥ ३८ ॥
आर्द्रकैलकुचद्रावैः सप्तधा भावितो यदि ।
हिंगुलः शुद्धतां याति निर्दोषो जायते खलु ॥ ३९ ॥
चौथी विधि-सिंगरफको अदरखके रसमें और लकुच ( बडहर )
के रसमें सात भावना देनेसे शुद्धताको प्राप्त हो निश्चय ही निर्दोष
होजाता है ॥ ३९ ॥
हिंगुलके लक्षण और गुण ।
बिम्ब्याभं हिंगुलं दिव्यं रसगन्धकसम्भवम् ।
मेहकुष्ठहरं रुच्यं बल्यं मेधाग्निवर्धनम् ॥ २४० ॥
जो हिंगुल ( सिंगरफ ) बिम्बी ( कंदूरी ) फलके समान लाल-
वर्णवाला होता है वह दिव्य गुणोंवाला है, पारे गंधकके संयोगसे उत्पन्न
होता है। यह प्रमेहनाशक, कुष्ठको हरनेवाला, रुचिकारक, बलवर्धक,
मेधाजनक और जठराग्निको दीपन करनेवाला है ॥ २४० ॥
शिलाजीतके नाम ।
शिलाजतुनि शैलेयमद्र्यं गिरिजमश्मजम् ।
धातुजं चाश्मजतुकं शैलजं चाश्मसम्भवम् ॥ ४१ ॥