सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 85, कुल 584 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 85

भाषाटीकासहित । ( ५९ )
वराटिकाभस्म परिणामशूल आदि संपूर्ण शूलोंका नाश करती है
तथा क्षयरोगनाशक, ग्रहणीरोगको हरनेवाली, कटु, उष्ण, दीपनी,
वृष्य, तिक्त और वातकफनाशक है ॥ ३३ ॥
नीलांजन शोधन ।
नीलाञ्जनं चूर्णयित्वा जम्बीरद्रवभावितम् ।
दिनैकमातपे शुद्धं भवेत्कार्येषु योजयेत् ॥ ३४ ॥
सुरमेंको चूर्णकर नींबूके रसमें एक दिन भावना देकर धूपमें सुखा
ले तो सुरमा शुद्ध होजाता है इसको जिस कार्यमें लेना हो उसमें
प्रयोग करे ॥ ३४ ॥
अथ हिंगुलप्रकरण ।
सिंगरफके पर्याय ।
हिंगुलो हिंगुलुर्यातिर्दरदः शुकतुण्डकः ।
रसगन्धकसम्भूतो हिङ्गलो दैत्यरक्तकः ॥ ३५ ॥
हिंगुल, हिंगुलु, याति, दरद, शुकतुण्ड, रसगंधकसम्भूत, हिङ्गुल,
दत्यरक्तक ( रसगर्भ, कपिशीर्षक, मनोहर ) यह सिंगरफके
नाम हैं ॥ ३५ ॥
हिंगुलशोधनविधि ।
अम्लवर्गद्रवैः पिष्ट्वा दरदो माहिषेण च ।
दुग्धेन सप्तधा पिष्टः शुष्कीभूतो विशुद्धयति ॥३६॥
सिंगरफको अम्लवर्गके रसमें पीस २ कर सात भावना देवे और
भैंसके दूधमें सात भावना देकर सुखा लेनेसे सिंगरफ शुद्ध होजाता है ३६॥
मेषीदुग्धेन दरदमम्लवर्गैर्विभावितम् ।
सप्तवारं प्रयत्नेन शुद्धिमायाति निश्चितम् ॥ ३७ ॥