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रसगंगाधर (पण्डितराज जगन्नाथ - रसतरङ्गिणी संस्कृत व हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण प्रथम आनन)

रसगंगाधर (पण्डितराज जगन्नाथ - रसतरङ्गिणी संस्कृत व हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण प्रथम आनन)

Rasagangadhara of Panditaraja Jagannatha with Commentary

पण्डितराज जगन्नाथ (टीकाकार: डॉ. श्रीनारायण मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished414 पृष्ठ

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पृष्ठ 317

प्रथमाननम् २५५
इत्यत्र स्मृतिर्न भावः, स्वशब्देन निवेदनादव्यङ्ग्यत्वात् । नापि स्मरणा-
लङ्कारः, सादृश्यामूलकत्वात् । सादृश्यमूलकस्यैव स्मरणस्यालङ्कारत्वम्,
अन्यस्य तु व्यञ्जितस्य भावत्वमिति सिद्धान्तात् । किं तु विभाव एव
सुन्दरत्वात्कथंचिद्रसपर्यवसायी ।
स्त्रीणां पुरुषमुखावलोकनादेः, पुंसां च प्रतिज्ञाभङ्गपराभवादुत्पन्नो
वैवर्ण्याधोमुखत्वादिकारणीभूतश्चित्तवृत्तिविशेषो व्रीडा ।
यथा—
कुचकलशयुगान्तर्मामकीनं नखाङ्कं
सपुलकतनु मन्दं मन्दमालोकमाना ।
विनिहितवदनं मां वीक्ष्य बाला गवाक्षे
चकितनतनताङ्गी सद्म सद्यो विवेश ॥
स्वशब्देन = स्मरणवाचकस्मरामीतिशब्देन । अव्यङ्ग्यत्वादिति । व्यङ्ग्य-
स्यैव व्यभिचारिणो भावत्वादिति भावलक्षणेनैव प्रतिपादितत्वादिति तात्पर्यम् ।
कथञ्चिदिति । नायिकास्वरूपालम्बनविभावातिरिक्तानुभावादीनामनवबोधादि-
त्याशयेनेदमुक्तम् ।
व्रीडां लक्षयति—स्त्रीणामिति । अधोमुखत्वादीत्यत्र आत्मगोपनं नखविलेख-
नादिकं च आदिपदग्राह्यम् ।
नायकः स्वमित्रं व्याहरति—कुचेत्यादि । कुचौ कलशाविव पीनोन्नती इति
नायक द्वारा अपने मित्र से कहे गये इस पद्य में स्मृति 'स्मरामि' इस क्रिया पद
का वाच्य है, व्यङ्ग्य नहीं। अतः यहाँ इसे भाव नहीं कहा जा सकता । इसे
स्मरणालङ्कार कहना भी सम्भव नहीं, क्योंकि सादृश्यदर्शनजन्य स्मृति ही अलङ्कार
होती । यहाँ तो स्मृति नायिका-विषयक पुनः-पुनः चिन्तन से जन्य है। यह
अलङ्कारिकों का सिद्धान्त है कि सादृश्यदर्शनजन्य स्मृति अलङ्कार है, और व्यङ्ग्य
होने पर भाव । नायिकास्वरूप आलम्बन विभाव के आकर्षक होने से विप्र-
लम्भ शृङ्गार-व्यञ्जक सामग्री के अभाव में भी किसी तरह यहाँ विप्रलम्भ की
व्यञ्जना मानी जा सकती है ।
स्त्रियों में पुरुषों के मुखदर्शन आदि से और पुरुषों में प्रतिज्ञाभङ्ग, शत्रुकृत पराभव
आदि से उत्पन्न वह विशेष प्रकार की चित्तवृत्ति 'व्रीडा' (लज्जा) कहलाती जिससे
मुख विवर्ण हो जाता, नीचे झुक जाता ॥
उदाहरण देखिए—
"अपने कलशतुल्य विशाल एवम् उन्नत कुचों के बीच मेरे द्वारा किये गये नख-