रसगंगाधर (पण्डितराज जगन्नाथ - रसतरङ्गिणी संस्कृत व हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण प्रथम आनन)
Rasagangadhara of Panditaraja Jagannatha with Commentary
पण्डितराज जगन्नाथ (टीकाकार: डॉ. श्रीनारायण मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 251, कुल 414 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रथमाननम् २१९
‘चुम्बनं देहि मे भार्ये कामचाण्डालतृप्तये’ इत्यादिग्राम्यार्थपरिहार
उदारता ॥
एकस्य पदार्थस्य बहुभिः पदैरभिधानम्, बहूनां चैकेन, तथैकस्य
वाक्यार्थस्य बहुभिर्वाक्यैः, बहुवाक्यार्थस्यैकवाक्येनाभिधानम्, विशेषणानां
साभिप्रायत्वं चेति पञ्चविधमोजः ॥
चुम्बनं देहीत्यादौ प्रतिपाद्योऽर्थो न विदग्धोचितः । अतो ग्राम्यत्वं नामाऽविद-
ग्धार्थोक्तिर्दोषस्तदभाव उदारतेत्यर्थः । अधमभिन्ने वक्तरि ग्राम्यत्वं दोषः, अधमोक्तौ
तु ग्राम्यत्वं गुण एवेति बोध्यम् । ग्राम्योक्तिकवलितो हि विभावादिरूपोऽर्थो न
रसनिष्पत्तये समर्थः, भ्रष्टं बीजमिवाङ्कुरायेति प्रदीपादौ स्पष्टम् ।
सम्प्रति क्रमप्राप्तमोजोगुणं वर्णयति—एकस्येत्यादिना । बहूनामित्यादि ।
बहूनां पदार्थानामेकेन पदेनाभिधानमित्यर्थः ।
ग्राम्य अर्थ का परिहार (करते हुए अग्राम्य—विदग्धोचित अर्थ का प्रतिपादन
किया जाय तो) ‘उदारता’ नामक अर्थगुण कहा जाता ।
उत्तम और मध्यम श्रेणियों की प्रकृतियों के लिए वैदग्ध्यरहित अर्थ का
प्रतिपादन करना ग्राम्यत्वदोष कहा गया है । किन्तु अधम प्रकृति के लिए तो यह
ग्राम्यत्व गुण है, दोष नहीं । अतः उत्तम और मध्यम प्रकृतियों द्वारा प्रतिपादित
अर्थ में हीं ‘उदारता’ सम्भव है ।
ग्राम्यत्व दोष का उदाहरण देखिये—
“ओ भार्ये (=प्रिये) ? कामरूपी चाण्डाल की तृप्ति के लिए मुझे
चुम्बन दे ।”
इसमें चुम्बन आदि ग्राम्य अर्थ का अभिधान होने से इस वाक्यार्थ में ग्राम्यत्व
दोष है । किन्तु यदि यही वाक्य किसी अधम प्रकृति—गँवार जन द्वारा प्रयुक्त हो
तो ग्राम्यत्व दोष नहीं होगा । अतः किसी उत्तम या मध्यम श्रेणी के मनुष्य द्वारा
ऐसा कहने पर हीं ग्राम्यत्व दोष समझना चाहिए ।
ओज पाँच प्रकार का होता है—(१) एक पद द्वारा जिस अर्थ का प्रतिपादन
सम्भव हो उस अर्थ का पद-समूह द्वारा प्रतिपादन किये जाने पर, (२) पद-समूह
द्वारा जिस अर्थ का प्रतिपादन किया जा सकता उस अर्थ का किसी एक
पारिभाषिक पद द्वारा प्रतिपादन किये जाने पर (३) एक वाक्य के द्वारा जिस
अर्थ का प्रतिपादन संभव हो उसका अनेक वाक्यों द्वारा प्रतिपादन किये जाने पर,
(४) अनेक वाक्यों द्वारा जिस अर्थ का प्रतिपादन किया जाना है उसका एक
वाक्य से प्रतिपादन किये जाने पर और (५) विशेषण के साभिप्राय, अर्थात्