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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 508 में से

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पृष्ठ 96

६६ रंगनाथ 'रामायण
कौन धर्म है, जिसे आप नहीं जानते । आपका सामना करके आपसे युद्ध करने की क्षमता
शिवजी में भी नहीं है । ऐसी दशा में दूसरो की शक्ति की वात कौन कहे ? हे परम-
पावन, देवेन्द्र भी आपकी कठोर प्रतिज्ञा को व्यर्थ नही कर सकता । आप हम सबको
क्षमा करके प्रसन्नता से गमन कीजिए ।"
दशरथ ने इस प्रकार कहकर प्रणाम किया और सिर झुकाकर चुपचाप खडे हो गये । फिर
भी परशुराम की आँखें क्रोध से लाल ही रहीं । उन्होंने अपनी प्रशसा में कहे हुए वचनो
को अनसुनी कर दिया और मन-ही-मन उन सबका दमन करने का विचार करके
अत्यंत क्रोध के साथ बोले—"जिस समय मे शिव के साथ धनुर्विद्या का अभ्यास कर रहा था,
उस समय कार्तिकेय ने मुझसे युद्ध आरभ किया, पर वह मुझसे हार गया । तब शिव ने
भी मेरी शक्ति की प्रशसा की थी । उस शिव के धनुप का तोडना मै कैसे सहन कर
सकता हूँ ?"
तब रघुराम ने हँसते हुए कहा—"मैने विनोदार्य उस धनुप का सधान किया, तो
वह टूट गया । इतना ही नही, मेरे सधान करने