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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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६४ रंगनाथ रामायण
देर के लिए आपस में इस प्रकार मिली, जैसे रति तथा मन्मथ के सुन्दर रूप वडी शोभा-
युक्त गति से परस्पर मिले हों । उसके पश्चात् रघुवीर ने सीता के लाल कमल के समान
कर को अपने हाथ में लिया और पुलकित गात्रो से दोनो एक ही पीठ पर आसीन होकर
वडी प्रीति से हवन का कार्य सपन्न करने लगे । जनक ने वडी प्रीति से श्रेष्ठ युवती
उर्मिला का हाथ लक्ष्मण के हाथ में दिया, कुशध्वज की पुत्रियो में से कमल के-से विशाल
नेत्रोवाली माडवी का कर भरत के हाथ में सौपा और चन्द्रमुखी श्रुतकीर्त्ति का हाथ
शत्रुघ्न को दिया ।
इस प्रकार वेद-विधि से पाणिग्रहण-सस्कार समाप्त करके दशरथ के पुत्रो ने अक्षता-
रोपण-विधि पूरी की और लाज-होम (धान का लावा अग्नि में डालने की क्रिया) सपन्न
करके मुनियो के आशीर्वाद प्राप्त किये । स्वर्ग के देवो ने दुंदुभियाँ वजाई, पुष्प-वृष्टि की,
देवता सतुष्ट हुए, मुनि प्रसन्न हुए, गधर्व अत्यन्त हर्षित होकर गाने लगे तथा आनन्द से
अप्सराएँ नृत्य करने लगी । तब वसि