रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबालकांड ५३
कौशिक वडे उत्साह से उग्र तप कर रहे हैं । उनका मनोरथ पूर्ण करके यदि उनकी तपस्या
को बद नहीं करायेंगे, तो उस पुण्यात्मा विश्वामित्र के तप से उत्पन्न अग्नि से सभी लोक
भस्म हो जायेंगे ।'
“उनकी बातें सुनकर ब्रह्मा उनको साथ लिये हुए विश्वामित्र के पास आये और
बोले—'हे कौशिक सुनो । अब इस उग्र तप की आवश्यकता नहीं है । आज से तुम
ब्रह्मर्षि हो गये ।'
“तब कौशिक ने ब्रह्मा आदि देवताओ को देखकर वडी भवित तथा आश्चर्य के साथ
कहा—'यदि मैंने सच ही ब्रह्मर्षि का पद प्राप्त कर लिया है, तो ब्रह्मा के पुत्र, चिर-
पुण्यात्मा, लोक-पावन वसिष्ठ आकर मुझे ब्रह्मर्षि कहें । तभी मैं विश्वास करूँगा ।'
“तब ब्रह्मा तथा देवताओ की प्रार्थना पर वसिष्ठ वहाँ आये और बोले—'अपने
उग्र तप से तुम ब्रह्मर्षि हो गये, इसमें कोई सदेह नहीं है । तुम प्रसन्न होकर जा सकते हो ।'
तब विश्वामित्र ने वडी भक्ति से वसिष्ठ की पूजा की । सभी देवता विश्वामित्र को आशीर्वाद
देकर देवलोक को चले गये ।
“विश्वामित्र की महिमा इन अद्भुत कार्यों