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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 508 में से

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पृष्ठ 74

४४ रंगनाथ रामायण
भरे पूर्ण कुभो, समिधाओ से भरे सुदर स्थलो, पक्तियो में सजे हुए दर्भासनो, उचित
आसनो पर विराजमान तपोनिधि मुनियो, अत्यन्त रमणीय रत्न-पल्लव तोरणो, सामादि वेदो
के घोषो, सतत यज्ञ के दर्शनार्थ आनेवाले तपस्वियो, आकाश तक व्याप्त होनेवाला हवन
का धुआँ, देवताओ का आह्वान करनेवाली ध्वनियो, पूजाओ को ग्रहण करनेवाले पुण्य
सयमी (मुनियो) तथा पूजाओ को प्राप्त करने में न थकनेवाले ब्राह्मणो से परिपूर्ण था ।
(गावि-पुत्र को आया जानकर) जनक महाराज बडे उत्साह से उनके सम्मुख गये,
मुनिनाथ को दंडवत्-प्रणाम किया और उन्हें ले जाकर उनकी उचित पूजा की और कुशल-
प्रश्न पूछे । उसके पश्चात् वे उस मुनीन्द्र की प्रशसा करते हुए कहने लगे—आपके आगमन
मे मै परम पवित्र हुआ । मेरा यज्ञ समृद्ध हुआ ।' इस प्रकार कहने के उपरान्त उस
मुनीन्द्र के पीछे सुशोभित विशाल वक्षवाले, काकपक्षधारी, महाधनुर्धर, कोमल शरीरवाले,
सुभग, यशस्वी, भूमि पर अवतार लिये हुए देवताओ के समान दीखनेवाले दयालु, सतत
प्रसन्नवदनवाले, भुवन-पावन चरित्रवाले, सूर्य तथा चन्द्र की-सी कान्ति से विलसित, आजानु-
बाहु, अश्विनीकुमारो के समान दीखनेवाले, अतुल पराक्रमी और कमल-लोचनवाले, राम
तथा लक्ष्मण को देखकर जनक ने विश्वामित्र से पूछा—'हे महात्मा, ये, धनुर्वाणधारी
तथा चतुर बालक किनके पुत्र है ? ये नव-पल्लव के सदृश अरुण तथा कोमल चरण-कमल
यहाँ तक कैसे पैदल आये ?'
तब विश्वामित्र ने कहा—'हे राजन् ये अनघ महाराज दशरथ के पुत्र हैं । इन्होंने
अपनी अमित शक्ति से मेरे यज्ञ की रक्षा की । कृपा करके अहल्या का उद्धार किया
और आपके घर में रखे हुए शिव-धनु को देखने यहाँ आये है ।' मुनीश्वर की इन बातो
से प्रसन्न होकर जनक ने उन (राजकुमारो) का स्वागत-सत्कार किया ।
फिर गौतम मुनि के शिष्य शतानन्द ने कौशिक को संबोधित करके कहा—“हे
महात्मा राघव को अपने साथ ले आकर आपने हम पर बडी कृपा की है। इस विश्वप्रभु
को यहाँ तक ले आने का कार्य किसके लिए संभव था ? राघव के चरण-रज ने मेरी
माता अहल्या के पापो का शमन कर दिया । गौतम मुनि के शाप से मुक्ति प्राप्त कर
मेरी माता फिर मुनि से मिल गई है । रामचंद्र के चरण की महिमा का वर्णन मैं किन
शब्दों में करूँ ?”
३१. विश्वामित्र की शक्ति का परिचय
इसके पश्चात् शतानंद ने राम की ओर देख कर कहा—“हे रामचंद्र, सुनते हैं कि
यह पुण्यात्मा कौशिक, इस पृथ्वी पर, आपके अभिभावक हैं । अब आपको किस बात की
कमी है ? विश्वामित्र की असमान क्षमता का वर्णन करना कठिन है । फिर भी आप
सुनें । हे दशरथात्मज, कुश नामक मुनि ब्रह्मा के पुत्र थे, कुश ने कुशनाभ को जन्म दिया ।
गावि उस कुशनाभ के पुत्र थे । ऐसे पवित्र गावि के ये (विश्वामित्र) पुत्र हैं । ये धर्म-
निरत होकर, अमित पराक्रम के साथ पृथ्वी का शासन करते थे । एक दिन विनोदार्थ
मृगया खेलने के लिए अपनी विशाल सेना के साथ निकले । बहुत समय तक वन में मृगया
खेलने के पश्चात् बहुत ही थके-माँदे होकर वे वसिष्ठ के आश्रम में पहुँचे । वसिष्ठ का