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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 492, कुल 508 में से

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पृष्ठ 492

साथ उस पुष्पक की पूजा की और उसकी परिक्रमा करने के बाद बड़े हर्ष से उस विमान
पर आरूढ़ हुए ।
तब राम ने सुग्रीव आदि मित्रों तथा अन्य वानरों को देखकर कहा—'तुम लोगों ने
मित्रता के नाते जो कार्य किये, उन्हें देवता भी नहीं कर सकते थे । मैंने तुम्हारे कारण
समस्त तेज, समस्त सुख तथा अपार कीर्त्ति प्राप्त की । तुम पुण्यात्मा, परम-पावन तथा
धन्यजीवी होओगे । अब तुम लोग अपने-अपने देश को लौट जाओ ।' तब कपियों ने
कहा—'हे राजन्, हम भी आपकी सेवा करते हुए अयोध्या जायेंगे, आपका राजतिलक
देखेंगे और आपके अनुपम चरित्रवान् अनुज भरत-शत्रुघ्न को, परम-पावनी आपकी माताओं
को देखेंगे और आपके नगर तथा गंगाजी के दर्शन करके लौटेंगे ।'
तब राम ने मन-ही-मन हर्षित होते हुए विभीषण, सुग्रीव, अंगद, हनुमान्, नील
आदि अनेक महान् वानर-श्रेष्ठों को पुष्पक में चढ़ने की अनुमति दे दी । वे भी बड़े उत्साह
से पुष्पक में बैठ गये । दनुज-स्त्रियाँ सीता को प्रणाम करके अपने-अपने निवास को लौट गईं।
तब दाशरथि को देखकर विभीषण ने कहा—'हे देव, इस पुष्पक की विशेषता यह है
कि इसमें कितने लोग भी बैठें, सब के लिए तो इसमें स्थान निकल आयगा, साथ ही
एक कोने में पाँच सौ लोगों के लिए स्थान बचा रहेगा ।' तब राम ने बड़े हर्ष से असंख्य
वानर एवं राक्षसों को उस विमान में बैठने की अनुमति दी । इसके पश्चात् वह पुष्पक
गगन की ओर उड़कर आकाश-मार्ग से, मनोवेग के सदृश वेग से ऐसा जाने लगा,
मानो सूर्यविम्ब पूर्व से पश्चिम को जाना छोड़ दक्षिण से उत्तर की ओर जा
रहा हो ।
१६१ श्रीराम का सीता को विभिन्न दृश्यों को दिखाकर समझाना
तब नित्य-पुण्यवान् राम ने सीता से कहा—'हे शुकवयनी, क्या तुमने अक लंक श्री
से विलसित इस लंका को देखा ? यह विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हुई है और त्रिकूट पर्वत
के मध्य में स्थित है । इस लंका का राज्य करने का भाग्य रावण को नहीं था, इसलिए
उस दुर्जन का नाश हुआ ।' उसके पश्चात् राम ने उन्हें रक्त, मांस, मज्जा तथा अस्थि-
खण्डों से परिपूर्ण समर-भूमि को दिखाते हुए कहा—'हे कमलाक्षी, यहीं पर रावण अपना
रण-कौशल दिखाते हुए युद्ध करके मारा गया । देखो, वहाँ महान् शक्ति-सम्पन्न कुम्भकर्ण
घोर युद्ध करने के पश्चात् हत हुआ । यहाँ पर प्रहस्त नील पर आक्रमण करके नष्ट हुआ।
यहीं पर हनुमान् ने महान् बली धूम्राक्ष का संहार किया । उस स्थान पर अजेय हो मेघ-
नाद ने हमें नाग-पाशों से बाँधा था । वहाँ पर सौमित्र ने अपना शौर्य तथा शक्ति दिखाते
हुए अतिकाय का वध किया था । यहाँ पर अक्षीण वलशाली मकराक्ष युद्ध करते हुए
गिरा था । इस स्थान पर शत्रु-दलन तथा अकुंठित विक्रमी अग्निवर्ण गिरा । उस स्थान
पर सौमित्र ने इंद्रजीत का संहार किया । हे सरोजाक्षी, इसी स्थान पर अंगद ने अनुपम
बली अतिकाय का वध किया था । इसी स्थान पर महोदर तथा महापार्श्व नामक भयंकर
विक्रमी लड़ते हुए गिरे थे । यहाँ देवांतक एव नरांतक क्रता से युद्ध करते हुए मारे
गये थे ।