रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 478, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ें४४८ रंगनाथ रामायण
उसने बड़े दर्प से रण-भूमि में रक्त से भीगकर पड़े हुए अपने सिरो तथा बाहुदडो को
निहारा, उनपर चोंच मारनेवाले पक्षी-समूह को देखा, फिर राम की ओर दृष्टि दौड़ाई ।
तब उसने केश नोचने से क्रुद्ध हो वधनों को तोडकर मुक्त होनेवाले सिंह के समान गर्जन
किया, दाँतो को उखाडने से क्रुद्ध होकर आक्रमण करनेवाले उग्र-साँप की भाँति, मूछो
को खीचने से खीजकर दड देने के लिए उद्यत यम की भाँति तथा सारे ससार को एक
साथ निगल जानेवाले के समान क्रोध से उन्मत्त हो, रावण ने भयंकर रूप धारण किया ।
फिर, अपनी पहले की सभी बाहुओ की शक्ति अपनी बची हुई दोनो बाहुओ में संचित
करके भयंकर अट्टहास किया, और अविराम गति से वरछा, तोमर, शूल, परशु, खड्ग, शर,
भाला, शक्ति, गदा आदि चलाते हुए राम को विविध प्रकार से कष्ट दिया, और ऐसे
आश्चर्यजनक साहस के साथ भयंकर युद्ध करने लगा कि देवता भी भयात्तुर हो उठे ।
शक्ति, गर्व एवं यत्न के साथ युद्ध करने