रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१० रंगनाथ रामायण
निर्मित उन वाणो के लगते ही समस्त वानर, अपना भुजबल खोकर पृथ्वी पर गिरने लगे।
इतने में रघुराम ने अपने अनुज के साथ क्रोध से धनुष धारण किये हुए रावण का सामना
किया । राम के धनुष का निनाद सुनते ही आकाश विदीर्ण-सा हो गया, समुद्र आलोडित
हो गये, दिग्गजो के कान के परदे फट गये और राक्षसो के चित्त डोल उठे । -क्रुद्ध दशकठ
के धनुष से निकलनेवाले भयंकर वाणो की ध्वनि सुनकर ही कितने वानर भयाक्रान्त
हो पृथ्वी पर गिरने लगे । तब राम-लक्ष्मण सूर्य-चन्द्र की भाँति भासमान होते हुए युद्ध
के लिए आगे बढे, तो देवताओ का शत्रु रावण राहु की भाँति शोभायमान होते हुए उनसे
जूझ गया । जब लक्ष्मण ने दशकठ पर अत्यत तीव्र शर चलाये, तब दशकठ ने उन्हें कठोर
वाणो से बीच में ही काट डाला और उनपर उग्र वाण चलाये । लक्ष्मण ने भी उसके
एक-एक वाण को खंडित करके उस पर तीन वाण एक साथ चलाये । तब रावण ने
अपने तीन वाणो से उनके वाण खंडित कर दिये । इसी प्रकार, जब लक्ष्मण दस वाण
एक साथ चलाते, तब वह उन्हें अपने दस वाणो से छिन्न-भिन्न कर देता, सौ वाण चलाते
तो वह अपने सौ वाणो से उन्हें चूर-चूर कर देता । इस प्रकार, सौमित्र को युद्ध-भूमि में
तंग करके उसके उपरात दनुजेश्वर राम से युद्ध करने चला । उसे देखकर सभी वानर इस
प्रकार भागने लगे, मानो वे यम को देखकर भाग रहे हो । तब राम ने क्रोध से आँखें
लाल किये हुए धनुष सँभालकर रावण का सामना किया । तब सभी देवता राम की
प्रशंसा करने लगे और पृथ्वी हिल उठी । तब रावण भी क्रोध से तेवर बदलकर राम से
भिड़ गया । राम तथा रावण भयंकर अट्टहास करते हुए धनु