रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 437, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंगिराकर गर्व से इतराने लगा । असुरेश्वर के बाणो से आहत कुछ कपि कमर के
टूटने से गिर पडते थे, कुछ चकराकर लुढक जाते थे, कुछ लोगो के वक्ष स्थलो के विदीर्ण
होने से गिर पड़ते थे, चरणो के कट जाने के कुछ वानर गिर जाते थे, कुछ लोगो के
हाथ कट जाते थे, कुछ वानरो के सिर फट जाने से वे भूमि पर लोट जाते थे, कुछ
कपियो के कठ कट गये और कुछ की जाँघें कट गईं, इसलिए वे कराहते हुए पृथ्वी पर
लोट गये । युद्ध-भूमि में कई ऐसे भी कपि थे, जिनके अग ऐसे कुचल गये थे कि उनके
अगो को पहचानना कठिन हो गया था । बाणो के लगते ही कुछ वानर भागने लगते,
किन्तु बीच में ही प्राणो के निकल जाने से वही पृथ्वी पर गिर जाते थे । इस प्रकार,
दनुजेन्द्र के बाणों के आघात को सह नही सकने के कारण वे सभी वानर प्राण लेकर
भागने लगे । रावण ने उनका पीछा किया । तब सुग्रीव वानर-सेना को देखकर कहने
लगा—'भागते क्यो हो, रुक जाओ, ठहर जाओ ।' फिर भी, वानर-सेना भागती ही रही।
तब उनको रोकने के लिए सुषेण को भेजकर, सुग्रीव ने स्वय एक वृक्ष को लिये हुए राक्षस-
सेना का सामना किया । उसके पीछे-पीछे पर्वतो को लिये हुए वानर-वीर भी चलने लगे ।
तब सिंहनाद करके वह प्रलय-काल के रुद्र की भाँति वृक्ष से प्रहार करते हुए शीघ्र गति से
राक्षसो का सहार करने लगा । अन्य वानर-वीर भी उसीके साथ राक्षस-सेना पर वृक्षो
तथा पर्वतो की घोर वृष्टि करने लगे । इससे राक्षसो के सिर फूट गये और कई राक्षस
कुलिश से आहत भग्न-शिखर कुल-पर्वतो की भाँति गिर पडे ।
११९. सुग्रीव के द्वारा विरूपाक्ष आदि राक्षसों का वध
तब रविपुत्र क्रोध से अपने नेत्र लाल किये हुए एक पर्वत को हाथ में लिये हुए
आगे वढा । तब विरूपाक्ष ने अत्यधिक रोष से रथ को आगे बढाते हुए धनुप का टकार
करके सुग्रीव पर वज्र-सम पैने बाण चलाये । किन्तु, रविपुत्र उनकी उपेक्षा करके उसके
रथ पर कूद पडा और रथ, सारथी तथा घोडो को एक पर्वत के प्रबल प्रहार से पृथ्वी
पर गिरा दिया । रथ से वचित किये जाने पर भी वह राक्षस-वीर पृथ्वी पर उतरकर
सुग्रीव पर विविध शरों को चलाने लगा । इतने में राक्षसेन्द्र की आज्ञा से, सभी आयुधो
से सज्जित करके, महावत एक मत्त गज को ले आया, तो विरूपाक्ष तुरत उस पर चढ
गया और कपियो पर भयकर प्रहार करके उनका सहार करने लगा और साथ-ही-साथ
सूर्य-पुत्र पर भी भयकर बाण चलाये । इससे सतुष्ट न होकर विरूपाक्ष कई शस्त्र और
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