रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयह सुनकर इन्द्रजीत ने वडे क्रोध में कालसर्प-सदृग वाणो को लक्ष्मण पर चलाया,
जो लक्ष्मण के गरीर को पार करके पृथ्वी में धँस गये । फिर, उसने लक्ष्मण के गरीर पर
कई गर चलाये, जो उनके गरीर को छेदकर दूसरी ओर निकल गये । लक्ष्मण के गरीर
मे, रौद्र रस की वाढ की तरह रक्त की धारा फूट निकली । यह देखकर राक्षस हर्प का
भीपण निनाद करने लगे । तब इन्द्रजीत ने अट्टहास करते हुए लक्ष्मण के निकट पहुँचकर
कहा—'हे राजकुमार, वडे गूर की भाँति तुमने मुझसे युद्ध ठाना है । पहले मैं तुम्हारा
कवच खड-खंड कर दूँँगा और उनके पश्चात् अपने दारुण अस्त्रो से तुम्हारा सिर काट
लूँगा । आज राम अवश्य ही अपने भाई को युद्ध-भूमि में पड़े हुए देखेगा ।'
तब लक्ष्मण ने उस निगाचर को देखकर कहा—'हे राक्षस, व्यर्थ ही गर्व क्यो
करते हो ? युद्ध-भूमि में प्रलाप करने से क्या प्रयोजन ? यहाँ से विना हटे, मेरे साथ
युद्ध करो । जिस प्रकार अग्नि विना कुछ कहे, जला डालती है, वैसे ही में विना बातें
किये ही अभी तुम्हारा वध कर डालता हूँ । व्यर्थ डींग मारने मे क्या