रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयुद्धकांड ३५७
क्या, कोई ऐसा नीच होगा, जो विपत्ति में पड़े हुए वधुओं को छोड़कर शत्रुओं की शरण ले ?
औचित्य की बात रहने दो । अपने लोगों को छोड़कर शत्रुओं की सेवा में जीवन
बितानेवाले व्यक्ति का जीवन भी कोई जीवन है ? राक्षसेश्वर महा तेजस्वी हैं । ऐसे
व्यक्ति तुम्हारे निष्ठुर वचनों को हित-वचन कैसे मान लेंगे ? भाई के क्रोध करने में यदि
तुम घर के किसी कोने में पड़े रहते, तो क्या होता ? वहाँ से भागकर भी तुमने कौन-सा
महान् कार्य सिद्ध कर लिया ? क्या, तुम्हारे प्रताप की सहायता से ही दशकंठ ने समस्त
देवताओं को जीत था ? हमारे अपने होते हुए तुम अपना रहस्य अपने शत्रु को बताकर
उसके हाथों में स्वयं भी नष्ट हो जाओ ।'
तब विभीषण ने कहा—'हे मेघनाद, तुम मेरे आचरण से भली भाँति परिचित हो ।
फिर भी, ऐसा प्रलाप क्यों करते हो ? तुम उस अविनीत पिता के अविनीत पुत्र ही तो हो ।
भला, तुम्हें धर्म और नीति का विचार ही क्यों होगा ? क्रूर वधु का उसी प्रकार त्याग
करना चाहिए, जैसे पाले हुए सर्प का त्याग करते हैं । यदि वह पापी दशकंठ मेरी बात
उस दिन मानता