रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'मैं जब तुमसे ऐसी विनम्र प्रार्थना करता हूँ, तब क्या यह उचित नही कि तुम
मेरी प्रार्थना पर विचार करो ? हे पर्वत, मैं अपनी विशाल भुज-शक्ति से समूल तुम्हें
उखाड़कर अभी यहाँ से ले जाता हूँ, अबतक जिन रामचन्द्र को तुम नही जानते हो,
उन्हें तब तुम जानोगे ।' इतना कहकर हनुमान् ने भयंकर गति से गर्जन करते हुए उस
पर्वत को जड़ से उखाड़ लिया, (पर्वत पर रहनेवाले) गंधर्वों को भगा दिया और उसे
उठाकर इतने वेग से जाने लगा कि कोई भी उसे पहचान न सके ।
सहस्र धाराओं से अत्यधिक दीप्त होनेवाले चक्र से युक्त विष्णु की भाँति जब
हनुमान् उस पर्वत को लिये हुए चलने लगा, तब राक्षस-वीरों के शर-प्रहार से घायल हो,
मूर्च्छित पड़े हुए कपियों ने श्रेष्ठ महौषधियों की वायु के स्पर्श-मात्र से ही अपनी आँखें खोल दीं ।
उन्होंने अत्यधिक उत्साह से सिंहनाद करते हुए युद्ध-भूमि में पड़े हुए दैत्य-सैनिकों
को उठा-उठाकर समुद्र में फेंक दिया। सुवेलाद्रि को पारकर हनुमान् ने उस महनीय ओषधि-
शैल को कपि-सेना के मध्य भाग में उतार दिया और अपने कुल के लोगों को तथा