सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 508 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 384

३५४ रंगनाथ रामायण

अग जर्जर हो गये और वे रक्त उगलते हुए पृथ्वी पर गिरकर मूच्छित हो गये ।
फिर, वानर शीघ्र ही सचेत होकर एक राक्षस को उठाकर दूसरे राक्षस पर प्रहार करके
गिराने लगे । इसी प्रकार, वे एक हाथी से दूसरे हाथी को, एक घोड़े से दूसरे घोड़े को,
एक रथ से दूसरे रथ को, फिर रथ से हाथी को, हाथी से घोड़े को, और घोड़े से राक्षस-
सैनिक को, मार-मारकर गिराने लगे । इस प्रकार, जब वानर सिंहनाद करते हुए अपनी
अनुपम शक्ति का प्रदर्शन करके भयकर गति से असुरो का सहार करने लगे, तब राक्षस-वीर
भी क्रोधोन्मत्त होकर वानरो पर टूट पड़े । उन्होंने वानरो पर वाण चलाये, उन्हें चक्रो से
मारा, गदाओ का प्रहार किया, खड्गो से काटा, बर्छियो को मास में तथा शूलो को
पसलियो में चुभोया और विविध रीतियो से उनको पीड़ित किया । फिर भी, वानरो ने धैर्य
नही छोड़ा । वे और भी क्रुद्ध होकर वडी भयकर गति से पर्वत-शृगो तथा तरु-काडो से
राक्षसो पर प्रहार करने लगे । कितने ही राक्षस आहत हो गिरने लगे, कुछ भागने लगे,
कुछ वही लुढकने लगे, कुछ रक्त उगलने लगे, कुछ भूमि पर लोटने लगे, सिर कट जाने
से कुछ के धड़-मात्र भूलने लगे और कुछ भरकर अपने शत्रुओं को भूलने लगे । कही