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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 379, कुल 508 में से

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पृष्ठ 379

युद्धकांड ३४६
वीर-रसावेश से अभिभूत था, बड़े साहस के साथ कपियों का संहार कर रहा था और
अत्यधिक रक्त में भीगा हुआ ऐसा दीख रहा था, मानो रौद्र रस ही मूर्त्त होकर राक्षस के
रूप में आ गया हो ।
तब सूर्यकुलोत्तम-राम भूपाल ने अत्यंत क्रोध से अपने धनुष की प्रत्यंचा का ऐसा
टंकार किया, मानो कह रहे हों कि नारी के कारण उद्भूत अपना सारा क्रोध इस नारी*
(प्रत्यंचा) के द्वारा प्रदर्शित करूँगा और दहाड़ते हुए आनेवाले इस राक्षस की क्रोधाग्नि
को मैं अपनी शर-वृष्टि से बुझा दूँगा । धनुष की ध्वनि सुनकर दिग्गज ऐसे चिंघाड़ने लगे,
मानो कह रहे हों कि गज-गामिनी ( सीता ) अब अपने स्वाभाविक निवास को प्राप्त
होगी । (उस ध्वनि से) लंका इस प्रकार गूंज उठी, मानो कह रही हो कि श्रीराम का क्रोध
अब लंकेश्वर को भस्म कर देगा । उस ध्वनि से समस्त जग बहरे-से हो गये ।
उस ध्वनि को सुनकर कुंभकर्ण रोष से भरकर, बड़े गर्व से अकड़ते हुए राम के
समक्ष आया । तब सूर्यवंशी राम ने बड़े दर्प के साथ उससे कहा--'हे