रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 365, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुद्धकांड
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के रुद्र के लिए प्रलय-रुद्र है ? ऐसा भीम-रूप हमने अबतक न कभी देखा, न उसके बारे
में कभी सुना ही है । यह तो बताओ कि वह कौन है ? क्या वह दानव है या दैत्य है ?
यह किस कुल का है ? वह कहाँ का रहनेवाला है ? इसका नाम क्या है ? इसे देखकर
सभी वानर त्रस्त है, इसका आकार-प्रकार देखकर आश्चर्य हो रहा है ।'
६१. कुंभकर्ण का शाप-वृत्तांत
तब विभीषण ने राम को देखकर कहा--"हे देव, इस दैत्य का वृत्तांत सुनिए ।
यह विश्रवसु का पुत्र है और इसका नाम कुंभकर्ण है । रावण का भाई तथा महान् क्रूर है।
देवताओ तथा दिक्पालो को पराजित करके उन्हें युद्धभूमि से भगा देनेवाला महान् बाहु
बली है । दीर्घशूल विविध आयुधो से युक्त तथा उद्धत शक्ति से संपन्न है । यह
समस्त ब्रह्माण्ड को भी विदीर्ण करने की क्षमता रखता है । शक्ति में ब्रह्मा से कम नही है ।
जन्म के समय से ही यह अपने कुरूप मुँह से जीवधारियो को निगलने लग गया था ।
इस प्रकार, जीव-धारियो को निगलते देखकर इन्द्र ने अपना वज्रायुध इस पर चलाया,
तब इसने क्रोध में आकर ऐरावत का दाँत उखाड लिया और उससे इन्द्र पर प्रहार किया।
उस प्रहार से इन्द्र मूर्च्छित हो गया । उसके पश्चात् वह सभी देवताओ को साथ लेकर
ब्रह्मा की सेवा में पहुँचा और उन्हें प्रणाम करके निवेदन किया--'हे देव, कुभकर्ण नामक
राक्षस पृथ्वी के जीवो का नाश कर रहा है और सुरो को पीडित कर रहा है । वह पर-
स्त्रियो पर बलात्कार कर रहा है और हठ करके समस्त ससार का नाश कर रहा है ।
यदि वह ऐसे ही अत्याचार करता रहा, तो विश्व का सर्वनाश निश्चित है ।'
"उनकी बातें सुनकर कमलासन मन-ही-मन बहुत ही क्रुद्ध हुए और सभी राक्षसो
को अपने समक्ष बुलाकर उनमें कुभकर्ण का भयकर रूप देखा । उसका रूप देखकर स्वय
ब्रह्मा को भी आश्चर्य हुआ । उन्होने कहा--'ऐसा लगता है कि यह समस्त ब्रह्माण्ड को
निगल जायगा । इसका आकार-प्रकार देखकर स्वय मुझे भी भय लग रहा है । जब इसका
रूप इतना भयकर है, तो क्या, यह त्रिनयन शिवजी को भी युद्ध में हरा नही देगा ?'
उसके पश्चात् ब्रह्मा ने ससार के प्राणियो का वध करने से उसे रोकने का विचार करके
कहा-'क्या, तुम्हारा जन्म पुलस्त्य के उत्तम वंश में इसलिए हुआ कि तुम अपना शौर्य
दिखाकर सभी लोको को त्रस्त करो 'और सभी प्राणियो का नाश करो ?' फिर, उन्होने
मृत्यु के समान शाप देते हुए कहा--'तुम निरंतर सोते रहो । बर्फ के वज्र के-से इस शाप
के लगते ही कुभकर्ण खडा रह नही सका और तुरत निद्रा के वशीभूत हो गया ।'
"तब रावण ने ब्रह्मा को प्रणाम करके कहा--'हे देव, आप इस पर कृपा-दृष्टि
कीजिए । स्वयं पौधा लगाकर फिर स्वय उसको कही काटते । यदि अपने आकार के कारण
यह दूसरो को कष्ट पहुँचाता है, तो उचित यही है कि उसे अच्छा उपदेश दिया जाय ।
ऐसे शाप से उसे दग्ध करना न्यायोचित नहीं है । इसके शाप का अत कैसे होगा, इसकी
भी व्यवस्था दीजिए ।' तब ब्रह्मा ने रावण से कहा-'यह लगातार छह मास तक सोता
रहेगा (प्रत्येक छह मास के वाद) सिर्फ एक दिन यह जगा हुआ रहेगा ।' हे देव, उसी
समय से वह निश्चित होकर सोता और जागता रहता है । आपके दिव्य वाणी की भयकर