रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 355, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंमागधो के स्तुति-गान की गंभीर ध्वनि, रथो के चलने की ध्वनि, सैनिको के हुकार, तथा
पृथ्वी को विदीर्ण करनेवाले उनके पदाघात की सम्मिलित ध्वनि भयंकर गति से समस्त
ब्रह्माण्ड में ऐसे व्याप्त हो गई, मानो लका के समुद्र के सभी जलचर एक साथ आर्त-ध्वनि कर
रहे हो कि रामचन्द्र जैसे पहले समुद्र पर क्रुद्ध हुए थे, वैसे ही वे आज क्रुद्ध हो गये हैं ।
(राक्षसो के) वृहदाकार रथ, रामचन्द्र के मनोरथो के समान ऐसे चलने लगे, मानो कह
रहे हो कि हे राम, हम दैत्य-समूह को ले आये है, आप इन्हें ग्रहण कीजिए । असख्य
गज-समूह पृथ्वी को कँपाते हुए चलने लगे । उनके कर (सूँड) रामचन्द्र के करो (हाथ)
के लिए दुर्जय न होने पर भी भयंकर दीख रहे थे और उन सूँडो के चारो ओर शिली-
मुख (भ्रमर) ऐसे झकार कर रहे थे, मानो कह रहे हो कि इनमें रामचन्द्र के शिलीमुख
(वाण)-समूह लगकर इनका (गजो का) मद गिराने के पहले हम अब इनकी मद-धाराओ
का पान कर लें । घोडे ऐसे झूमते हुए चल रहे थे,