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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 508 में से

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पृष्ठ 35

[बालकांड] [५]

दीखनेवाले, गोनवंश-रूपी उदयाद्रि पर भानु-सम दीप्त होनेवाले, गोनवंश-रूपी क्षीरसागर
के (उत्पन्न) चंद्र सम सुशोभित, अपनी कीर्त्ति को दिग्-दिगंतों में व्याप्त करनेवाले, अपने
दान-धर्म के द्वारा सबकी प्रशंसा प्राप्त करनेवाले, अपने असमान पौरुष से बड़ी आसानी से
शत्रुओं का नाश करनेवाले, महा बलशाली एवं प्रतापी राजाओं के लिए वज्रपाणि सम
दीखनेवाले, (शत्रु) नृप-वन के लिए साक्षात् अग्निदेव, सत्यनिष्ठ, महाबलशाली शत्रु-सेनाओं
को मथने में मयर पर्वत की भाँति प्रचंड रूप धारण करनेवाले, अपने खड्ग-रूपी सूर्य-बिम्ब
की प्रभा से प्रतापी राजा-रूपी अंधकार का नाश करके अमर-वधुओं के मुख-कमलों को
वीर-भ्रमरों से अलंकृत करनेवाले, शत्रुओं के प्राण-रूपी अनिल का सेवन करनेवाले श्रेष्ठ
भुज-भुजंगों (सर्प-रूपी भुजाओं) पर राज्य-भार वहन करनेवाले थे, वे कुरु, केरल, अवंती,
कुंतल, द्रविड़, मरु, मत्स्य, करुष, मगध, पुलिंद, सरस, पाण्ड्य, कोसल और बर्बर की राज-
सभाओं में प्रशंसा प्राप्त करनेवाले, साम-दाम-भेद आदि नीतियों में निपुण, प्राचीन राजाओं
के समान समस्त वैभवों से युक्त तथा नय, विनय आदि उपायों से सुस्थिर विजय
प्राप्त किये हुए, यशस्वी विट्ठलनरेश, राजाओं में सर्वज्ञ, नरेशों से पूजित, सफल जगद्धित-
चातुर्य-धुरी, एक दिन अपनी राज-सभा में बैठे हुए थे। उस समय पुराणवेत्ता, शास्त्रज्ञ,
काव्य-नाटक-शिरोमणि, मित्र, मंत्री, पुरोहित, आश्रित, पुत्र, सामंत राजा और बहुश्रुत उनकी
सेवा में उपस्थित थे। राजा भूलोक के देवेन्द्र के समान बड़े उत्साह से रसिकजनों द्वारा
भारत, रामायण आदि का पाठ सुनकर बहुत प्रसन्न हुए।
तत्पश्चात् वे रसिक-शेखर (राजा) राम-कथा-सुधा से अनुरक्त हो, सभा में यों बोले—
'तेलुगु में रामायण को सुंदर ढंग से कहने की कविता-शक्ति रखनेवाले कवि इस संसार
में कौन हैं?' तब पंडितों ने उस उदात्त, यशस्वी विट्ठलनरेश से कहा--
(महाराज) आपके सुपुत्र, निपुण, पापरहित, नीति-निष्ठ, सर्वज्ञ, अनघ, शिष्ट-संपन्न,
सर्वपुराणवेत्ता, सुंदर कलाओं के मर्मज्ञ, सज्जनों को आश्रय देने में ही सुख का अनुभव
करनेवाले, कविसार्वभौम, कवि-कल्पतरु, कवि-कुल-भोज, कवीन्द्र, शत्रु-राजाओं के लिए वज्र-
पाणि, शत्रु राजा-रूपी वन के लिए प्रचण्ड पावक के समान दीखनेवाले, जिनके भयंकर
खड्ग में स्वर्गलोक तक प्रतिबिंबित है, त्रिलोक-दुर्दम, श्रेष्ठ-साधु-जन-रूपी कमलों के लिए
सूर्य, पुरुषश्रेष्ठ, आपके परम भक्त, निखिल शब्द, अर्थ, गुण आदि के ज्ञाता, महापंडित,
रामायण के मर्मज्ञ बुद्ध-नरेश (रामायण की कथा तेलुगु में कहने की) कविता-शक्ति
रखते हैं। (काव्य रचने के लिए) आप उन्हें आदेश दें।"
यह सुनकर उदात्त चरित्रवाले मेरे जनक ने मुझे बड़े स्नेह से बुलाकर यह आदेश
दिया—'रामायण की कथा पुराणों के ढंग पर तेलुगु भाषा में मेरे नाम पर लिखो कि
संसार के कवि और पंडित उसकी प्रशंसा करें।' उनके मृदु वचनों से अत्यंत हर्षित होकर
उनकी आज्ञा का पालन करने के हेतु शत्रुओं के लिए भयंकर मूर्ति, महान्, ललितसद्गुणा-
लंकारवाले, निश्चल दयालु, धन्यात्मा तथा पुण्यात्मा मेरे पिता विट्ठलनरेश के नाम पर
श्रीरामचन्द्र का चरित्र, इस ढंग से लिखूँगा कि राजा, पंडित, रसिक, सुकवि श्रेष्ठ,
गोष्ठियों में (उसे सुनकर) हर्षित होकर उसकी प्रशंसा करेंगे और जिसमें, शब्द, अर्थ, भाव,