रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 341, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुद्धकांड ३११
तट पर से आकाश की ओर उछला । जिस वेग से वह उछला, उस वेग के कारण पृथ्वी
के नीचे रहनेवाला आदिशेष चौंक पड़ा । उसके पखों से उत्पन्न अत्यधिक वायु मे आकाश
आलोदित-सा हो गया और नक्षत्र गिरने लगे । पखों की फडफडाहट के कारण उत्पन्न
ध्वनि से समस्त लोक भयाक्रात-से हो गये और समस्त आकाश धूलि से व्याप्त हो गया ;
उसकी तीव्र गति के कारण शैल-श्रृंग लुढकने लगे और समुद्र आलोडित होने लगा । वह
दस सहस्र सूर्यों की सयुक्त प्रभा के समान दीप्त हो रहा था और प्रभा-समन्वित पक्षो से
युक्त मेरु पर्वत के समान दीख रहा था । इस प्रकार, आकाश-मार्ग से आनेवाले गरुड
को देखकर राम-लक्ष्मण को आबद्ध किये हुए सभी नाग उन्हें छोड़कर चले गये । यथार्थ
तो यह है कि जो कोई उस गरुड का स्मरण करता है, वह सभी प्रकार के वधनों से
मुक्त हो जाता है । फिर, राम स्वय भी यदि चाहते, तो वे अपने वधनों को काट देने में समर्थ थे ।
सुग्रीव आदि वानर आश्चर्य-चकित हो देखते रहे । गरुड ने राम की परिक्रमा की
और राम-ल