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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 335, कुल 508 में से

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पृष्ठ 335

आया और अदृश्य होकर, आकाश से ही, राम-लक्ष्मण पर घोर अस्त्रो की वर्षा करने लगा ।
राम तथा लक्ष्मण ने भी असख्य शर आकाश की ओर चलाये, किन्तु उनमें मे एक भी
इन्द्रजीत को नही लगा । वह राक्षस आकाश में अदृश्य रहकर वडे गर्व से सभी दिशाओ
में घूमते हुए श्रेष्ठ वानर-वीरो का सहज ही नाश करने लगा । सूर्य-किरणो के समान
आकाश से आनेवाले उसके क्रूर अस्त्र, वानरो तथा रामचन्द्र को दिखाई पडते थे, किन्तु
उसके रथ की ध्वनि, घोडो के खुरो की ध्वनि, धनुष का टकार, सारथी की बातें, कोडे
की ध्वनि, रथिक (इद्रजीत) का गर्जन तथा उसका रूप, रथ तथा उसकी ध्वजाएँ कही
भी दिखाई नही देती थी । यह विचित्र युद्ध उस कपि-सेना को ऐसा लग रहा था, मानो
वालि का सहार करनेवाले राम पर क्रुद्ध होकर इन्द्र अपने पुत्र के वध का प्रतिशोध लेने
के उद्देश्य से भयकर बाणो की वर्षा कर रहा हो । कपि-सैनिको के अगो को खडित होते
हुए देखकर रामचन्द्र से लक्ष्मण बोले-- 'हे देव, आकाश में छिपकर युद्ध करनेवाले इस
राक्षस के