रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 333, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुद्गर, धूलि के समान बने हुए परिघ तथा खड्ग, खड-खड बने हुए चक्र तथा शूल, चूर्ण
के समान बने हुए लट्ठ, खंडित रथ-चक्र, छटपटाते हुए अश्व, गिरकर मिट्टी चाटनेवाले
सारथी, सभी दिशाओ में बिखरकर पडे हुए आभूषण, टूटकर गिरे हुए रत्न, कटे हुए हाथ
तथा मरकर गिरे हुए असुर भयोत्पादक ढंग से स्थान-स्थान पर पड़े हुए दिखाई दे रहे थे ।
वह युद्ध-क्षेत्र राम के वशीभूत उस क्षुब्ध-समुद्र की समता करता था, जिसका गर्व
राम ने अपने दुर्दमनीय शरो के प्रहार से भग्न कर दिया था और फलस्वरूप उसके
समस्त जल के सूख जाने से जल में निवास करनेवाले वृहदाकार मीन, मकर तथा उरग
छटपटाने लगे थे । उस युद्ध-भूमि में घड इस प्रकार हिल रहे थे, मानो कह रहे हो कि
जो रावण गर्वांध होकर सीता को ले आया है, उसकी धड पर सिर कैसे रह सकेगा ?
(कट-कटकर मरे हुए लोगो की) मज्जा रूपी कीचड, केश-समूह-रूपी सैंवार, खोपडी-रूपी
सीप, खंडित होकर गिरे हुए शिला-