रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकी अँगुलियों को दोनो हाथो से दबा रहा था । बंदी-मागधो की तरह उनके चारो ओर
नल-नील तथा जांबवान् आदि प्रमुख सेनापति उनकी स्तुति कर रहे थे—'हे सकल
लोकाराध्यचरण, हे जानकी-हृदयांबुज-षट्चरण, हे दीनार्त्तिहरण, हे स्तवनीयकृपाभरण, हे हर-
वद्य नाम, हे सूर्यकुलाब्धिसोम, हे गत्रुनागक, हे रघुराम आदि ।' तब रामचंद्र पूर्णचन्द्र के
समान शोभायमान होनेवाले अपने मदहास-युक्त तथा अविरल करुणामृत से परिपूर्ण मुख-
मंडल में विलसित धवल अरविंद की सुंदरता को भी परास्त करनेवाले नेत्रो की कांति को,
चारो ओर विकीर्ण करते हुए, अपने ललित कटाक्ष-रूपी चंद्रिका की वृष्टि करते हुए,
अपने दोनो हाथो के समीप बैठे हुए, राक्षसो के भेदो के ज्ञाता विभीषण के साथ अत्यन्त
रहस्यपूर्ण वार्त्तालाप कर रहे थे । उस समय उनका मुँह दक्षिण की ओर था । इसलिए
उन्होने रावण को देखकर कहा—'हे विभीषण वहाँ देखो । उस दुर्ग के उन्नत शिखर पर
कोई सिंहासन पर आसीन है । उस पर त