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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 317, कुल 508 में से

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पृष्ठ 317

हे इन्द्रारि, यम के सदृश करोडो वानरो की सेवा प्राप्त करते हुए रहनेवाले उस गवाक्ष
को देखिए, वह युद्ध करने के लिए अत्यधिक उत्साह प्रकट कर रहा है। उस केसरी नामक
वानर को देखिए, जो उत्तुंग कांचन पर्वत का स्वामी है । उसके पास, धवल वर्णवाले,
उद्दण्ड पराक्रमी, सूर्य-सम तेजस्वी, तथा रण में भयंकर रूप धारण करनेवाले विविध रूपो
के दस सहस्र प्रख्यात वानर हैं । हे देवताओ के शत्रु, उस अद्वितीय पराक्रमी, महान् बल-
शाली, शतवली को देखिए, जो राम की कृपा प्राप्त करके उनके लिए अपने प्राण त्यागने
के लिए सतत सन्नद्ध रहता है । उसकी सेवा में सिंह-शावक को मात करनेवाले विशाल
पिंगल-नेत्रवाले सहस्र करोड वानर हैं । वही सुषेण है, जो अपने समान सहस्र करोड वानरो
को साथ लिये हुए युद्ध के लिए तैयार खडा है । वह उल्कामुख है, जो दस करोड वानरो
के साथ ठहरा हुआ है । यहाँ देखिए, यह ऋषभ है, और इसकी वानर-सेना दस करोड
की है । वह देखिए, वही विशाल भुजाओवाला गंधमादन है, जिसके अधीन सौ करोड
वानर हैं