रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 314, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ें२८४ रंगनाथ रामायण
क्यो हुई ? आपका तथा आपकी लका का सर्वनाश करने के लिए इन राक्षसो ने निश्चय
किया हैं । उचित यही है कि आप सीता को राघव के हाथो में सौप दें और बुद्धिमान्
होकर इस ससार में सम्मान प्राप्त करते रहें ।'
इस प्रकार, कई रीतियो से अतिकाय ने रावण से हित-वचन कहे, किन्तु
रावण ने उसकी बातो की जरा भी परवाह नही की । उसने वडे साहस के साथ शुक
तथा मारण को देखकर अपना शौर्य दरसाते हुए कहा—'यह वड़ी विचित्र वात है कि एक
मानव समुद्र पर पुल वाँधे । तुम लोग कहते हो कि राम ने ऐसे पुल का निर्माण किया है ।
इसलिए तुम दोनो उसकी सेना में प्रवेश करके उसकी गक्ति का पता लगाकर आओ ।'
३२. शुक तथा सारण का राम की सैन्य-शक्ति का परिचय पाना
तब उन दोनो ने वानरो का वेश धारण करके जगलो, उपवनो तथा पर्वतो में सेतु
के निकट और समुद्र के उस पार के प्रदेशो तथा गुफाओ में विचरण किया और सव स्थानो
में व्याप्त वानर-सेना को देख आश्चर्य से अपने सिर कँपाने लगे । फिर, वे आश्चर्य-पुलकित
गात्र से वानर-सेना के भीतर प्रवेश करने लगे । उस समय विभीषण ने उन्हें पहचान लिया
और उन्हें वदी वनाकर रामचंद्र के सम्मुख उपस्थित करके कहा—'हे राजन्, ये दोनो
रावण के मंत्री है । वानरो के वेश में यहाँ आये है । इनके नाम शुक तथा सारण हैं ।
वे हमारी सेना में प्रवेश करके हमारी सभी वातो का परिचय प्राप्त करके जाना चाहते है ।'
तब उन गुप्तचरो ने भय से अत्यधिक आक्रान्त होकर हाथ जोडकर प्रणाम किया
और कहा—'हे देव, हम रावण के भेजे हुए गुप्तचर हैं । विभीषण ने जो कहा, वह
सत्य है । रावण ने आज्ञा दी है कि हम आपकी सेना का पता लगाकर आयें । इसलिए
हम आये हैं ।'
तब राघव ने हँसते हुए कहा—'तुम रावण के मत्री हो, इसलिए तुम्हें मार डालना
ही उचित है । किन्तु में तुम्हें मारना नही चाहता । तुम्हें मारने से हमारा क्या हित हो
सकता है ? तुम यहाँ की सभी वातें विना किसी अपवाद के देख लो और शीघ्र जाकर
अपने प्रभु रावण से सारी वातें कहो । उसमे यह भी कहना कि जिस शक्ति के भरोसे
वह सीता को चुराकर लाया है, उस शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ आये । उसमे
कहना कि मै युद्ध में लका के सभी राक्षसो का तथा गर्व से फूलनेवाले उसका भी वध
कहूँगा । अब तुम जाओ ।'
तब उन दोनो ने विभीषण के साथ जाकर समस्त वानर-सैन्य की शक्ति का पता
लगा लिया और तुरत रावण के पास जाकर बोले—'हे देव, आपकी आज्ञा के अनुसार
हम वानर-सेना के निकट जाकर उसको देखने लगे, तो आपके अनुज विभीषण ने हमें
पहचान लिया और हमारा वध करने के उद्देश्य से हमें वदी वनाकर राम के सामने उप-
स्थित किया । लेकिन रामचंद्र दयानिधि है, इसलिए उन्होने हमारे वध की आज्ञा नही दी ।
हे लंकेश्वर, आपका, आपकी लका का तथा समस्त राक्षसो का नाश करने के लिए एक
सौमित्र ही पर्याप्त है । अब राम के शौर्य का वर्णन क्या करें ? हे देव, हमने सेतु को
देखा । वह शत योजन लवा और दम योजन चौड़ा है । ऐसे विशाल सेतु-भर में वानर