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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 312, कुल 508 में से

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पृष्ठ 312

२८२ रंगनाथ रामायण
३१ कैकसी का हितोपदेश
उस समय कैकसी सभा में आई। उसे देखकर रावण ने बड़े आदर के साथ उठकर उसे
प्रणाम किया और योग्य आसन पर उसे बिठाकर स्वयं भी बैठा। फिर, अत्यत विनय से
उससे कहा—'हे माता, आप तो कभी राज-सभा में नही आती । आज आपके आगमन
का क्या कारण है ? कृपा करके बतलाइए ।'
तब उसने कहा—"हे पुत्र, मै जितना जानती हूँ उसे कहूँगी । ध्यान से सुनो ।
राम की पत्नी पर आसक्त होकर तुम उन्हें धोखे मे हरकर ले आये हो। इसीलिए आज
ऐसी भयंकर घटनाएँ घट रही है । स्वयं विष्णु ने आर्यों के रक्षणार्थ दशरथ का पुत्र होकर
जन्म लिया, ताड़का का सहार किया, कौशिक के यज्ञ की रक्षा की, अपने चरणो की धूलि
से शिला को स्त्री के रूप में बदल दिया, बड़े हर्ष से शिव-धनु का भग किया, जानकी से विवाह
किया, परशुराम के गर्व को तोडा, अपने पिता की आज्ञा मानकर लक्ष्मण तथा जानकी के
साथ वनवास के लिए आया, वनो में रहनेवाले मुनियो को अभयदान दिया, तुम्हारी वहन
के नाक-कान काट दिये, खर-दूषण का सहार किया, मारीच का वध किया, अपने भयंकर
अस्त्र से वालि को गिरा दिया, सूर्यनदन को अपना सेवक बना लिया, अपने बाण के अग्र
भाग पर उपस्थित होने के लिए समुद्र को विवश किया, कपियो से समुद्र पर पुल बँधवाया
और अब देवताओ की रक्षा करने तथा असुरो को दण्ड देने के उद्देश्य से सुवेलाद्रि पर आकर
ठहरा हुआ है । उस दानवातक (राम) ने इस पृथ्वी पर मत्स्य, कूर्म, वराह, सिंह, वटु,
(भार्गव) राम, तथा (दशरथ-पुत्र) राम के रूप धारण किये है । वे स्वयं आदिनारायण है।
उनकी महिमा का वर्णन करना किसी के लिए सभव नही है। उनकी आज्ञा से ही वायुपुत्र ने
समुद्र पार किया, जानकी को राम का सदेश सुनाया, यक्ष आदि राक्षसवीरो का संहार
किया और लका-दहन करके अपने प्रभु के पास लौट गया । तुम उस पवनपुत्र को ही
जीत नही सके । तब उसके प्रभु को जीतना क्या, तुम्हारे वश की बात है ?
तुम्हारे पिता ने एक दिव्य रहस्य मुझसे कहा था । उसे में तुम्हें सुनाती हूँ । ध्यान
से सुनो ।
"एक वार ब्रह्मा तथा इन्द्र, मुनि, यक्ष तथा गधर्व-नेताओ को साथ लेकर विष्णु
भगवान् के दर्शनार्थ गये और उनसे निवेदन किया—'हे प्रभो, रावण तथा कुंभकर्ण के
अत्याचार असह्य हो गये है । कृपया उनसे आप हमारी रक्षा करें।' तब उन्हें देखकर
कमलनाभ ने कहा—'मै सूर्यवश में जन्म लेकर युद्ध में सहज ही इन राक्षसो का संहार
करूँगा।' फिर, उन्होंने सभी देवताओ को देखकर कहा—'तुम वानरो का रूप धारण कर पृथ्वी
पर जन्म धारण करना और युद्ध में मेरी सहायता करना ।'
"यह वृत्तात तुम्हारे पिता ने मुझे बताया था । वह विष्णु ही ये राम हैं । लक्ष्मी
ही उनकी पत्नी है । देवता ही वानर है । उन्हें तुम युद्ध में जीत नही सकोगे । अत;
तुम अपनी दुर्बुद्धि तज दो और उस भूसूता, जगन्माता, निगमो द्वारा प्रशसित, निखिल-लोक-
विख्यात, अमित-गुणोपेता, पवित्र सीता को राम के चरणो में सौंप दो । पापशोषक, धीर,
सतत शुभाषी तथा आर्य-पक्षपाती विभीषण को लका का राज-तिलक कर दो और राम