रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 297, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुद्धकांड २६७
तुम लोग भय को त्यागकर अपने सिर उठाओ । तब सुग्रीव ने उन्हें देखकर कहा—'हे
वानरो, वह देखो, कोई अखड विक्रमी पर्वताकार, दीर्घकाय, शस्त्रो से सुसज्जित होकर
इसी ओर आ रहा है । देखो, वह कौन है ? तब सभी वानर बडे-बडे वृक्षो तथा पर्वतो
को हाथ में उठाकर कहने लगे—'हे सुग्रीव, हे देव, हमें उससे युद्ध करने के लिए भेजिए;
हम युद्ध में उस दैत्य का सहार करेंगे ।'
उनकी बातें सुनकर विभीषण ने कहा—'हे वानरो, मैं तुम्हारे पक्ष का ही व्यक्ति हूँ ।
इस प्रकार उतावले मत बनो । मैं रावण का भाई हूँ, किन्तु मैं उत्तम राक्षस तथा
निष्कलक मन का हूँ । श्रीराम की शरण पाने के निमित्त मैं लका से यहाँ उनकी सेवा
में आया हूँ । मैंने रावण को विविध रीति से समझाया कि तुम सीताजी को राम की
सेवा में पहुँचा दो, किन्तु रावण ने मेरी बातो से क्रुद्ध होकर भरी सभा में मुझ पर पद-
प्रहार किया । उससे सतुष्ट न होकर उसने निर्दय होकर मुझसे कहा कि यदि तुम मेरे
राज्य में रहोगे, तो मैं तुम्हारा वध कर