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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 291, कुल 508 में से

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पृष्ठ 291

युद्धकांड २६१
सुनकर मन-ही-मन अत्यत प्रसन्न होते हुए राक्षसराज ने कहा—'हे महापार्श्व, सुनो ।
एक बार मैं ब्रह्मा की सभा में जाते समय पुजिकस्थली नामक एक सुदरी को देखकर उस
पर मुग्ध हुआ और वासना से प्रेरित होकर वलपूर्वक उसके साथ रति-क्रीडा की । यह
बात जानकर ब्रह्मा मुझ पर क्रुद्ध हुए और शाप दिया कि हे राक्षस, स्त्रियो के प्रति आदर
दिखाये विना, अनुचित रीति से यदि तुम भविष्य में किसी भी स्त्री के साथ वलात् रति-
क्रीडा करोगे, तो अवश्य तुम्हारे सिर के सौ टुकड़े हो जायेंगे । यही कारण है कि मैं
किसी भी स्त्री की स्वीकृति प्राप्त किये विना उसके साथ वलात्कार नही करता । मेरी
शक्ति का विचार किये विना वानर-सेना के साथ राम का लंका पर चढ आना उसी
प्रकार है, जैसे भद्रगजो के समूह का सोनेवाले सिंह को जगाना ।'
तब विभीषण ने हँसकर रावण से विनयपूर्वक निवेदन किया—'हे भाई, तुम्हारे
लिए सीता एक भयंकर कालसर्पिणी है । उनकी उसामें ही (नागिन का) फुफकार है
और उनका दुख ही गरल है । वह (काली नागिन) किसी भी