रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें' युद्धकांड २५६
उसके पश्चात् मंत्रणा-कुशल विभीषण सभी मंत्रियो के समक्ष कहने लगा—"हे देव,
हे दैत्यनाथ, आप ध्यान देकर मेरा निवेदन सुनिए । जिस दिन से आप सीता को ले आये हैं,
उसी दिन से दु शकुन दिखाई देने लगे हैं । आजकल होम-कुडो में त्रेताग्नियाँ प्रदीप्त
नही होती । उन कुडो को घेरकर बहुत-से साँप पडे रहते हैं । सतत मदजल वहानेवाले
जिन हाथियो के गडस्थल पर भ्रमरो का गुजार होता रहता था, वे मत्तगज आज शुष्क
शरीरो से, गर्दनो को ऊपर उठाये, चुपचाप खडे रहते हैं । अत्यधिक शक्ति तथा स्फूर्त्ति
से सपन्न उत्तम अश्व, आज आंखो से पानी गिराते हुए चारा-पानी छोडकर, शक्तिहीन
हो पडे हुए हैं । हे असुराधिपति, इन सब के निराकरण का एक ही मार्ग है । आप सीता
को ले जाकर श्रीराम को सौंप दीजिए । वे आपके अपराध पर ध्यान नहीं देंगे (वे आपको
क्षमा कर देंगे) । यही नीतिवान् के लिए 'उचित कार्य है । 'यही कार्य उचित है', इस
बात को सब लोग समझते हैं, किन्तु आपको इस धर्म का उपदेश देने से वे