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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 281, कुल 508 में से

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पृष्ठ 281

आप शत्रुओ का नाश कर देते हैं ।
17. अव उन सवका वर्णन ही मैं क्यो करूँ ? महान् वैभव से सपन्न हो रावण, प्रति दिन अपनी
18. सेना के साथ भ्रमण के लिए निकलता है और सवका निरीक्षण करता है । अपने उद्धत
19. गर्व से प्रेरित होकर वह सतत दूसरो को युद्ध के लिए चुनौती देता रहता है । पराक्रम
20. तथा शक्ति से सपन्न शत्रुओ के लिए भी लका को वश में करना दुष्कर है । इसके अलावा
21. समुद्र में जल, वन, (कृत्रिम) स्थल, तथा पर्वत के चार दुर्ग और हैं । वे सतत दिखाई
22. तो देते हैं, किन्तु उनको घेरने का उपक्रम करने जायें, तो उनका पता ही नही लगता ।
23. “हे राजन्, इस लका नगर की रक्षा करनेवाले भयकर राक्षस मृत्यु की जिह्वा की
24. समता करनेवाले, शूल धारण किये हुए सतत रक्षण-कार्य में तत्पर रहते हैं । ऐसे रक्षक
25. पश्चिम द्वार पर दस सहस्र रहते हैं । पूर्व द्वार पर स्वय रावण चतुरगिणी सेना के साथ
26. रहता है । दक्षिण द्वार पर एक लाख राक्षस रक्षा करते रहते हैं । उत्तर द्वार पर अगणित
27. शस्त्रो से सुसज्जित एक लाख राक्षस रहते हैं । नगर के मध्य में एक लाख पच्चीस
28. हजार राक्षस रहते हैं । हे सूर्यवशतिलक, ऐसी लका में, विना अन्य किसी का ध्यान