रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१. श्रीराम का हनुमान् की प्रशंसा करना
आश्रितो के हिताकाक्षी, सूर्यवश के सवर्द्धक रामचन्द्र ने जब प्राणाधिका प्रिया के इन प्रिय
वचनो को हनुमान् के द्वारा सुना और उनका पता जान लिया, तब उन्होने बडे प्रेम से
कहा—"हनुमान् ने जैसा कार्य किया है, क्या, वैसा कार्य करना देवताओ के लिए भी सभव है ?
ऐसा प्रतीत होता है कि शक्ति में या तो हनुमान् ही श्रेष्ठ है, या पवन श्रेष्ठ है या
गरुड ही श्रेष्ठ हैं । समुद्र को पार करना उनके सिवा और किसके लिए सभव है ? देव,
गधर्व, दैत्य तथा किन्नरो के लिए भी दुर्गम, राक्षस-सेना के प्रचड बाहुबल से दिन-रात
सुरक्षित लका में प्रवेश करके वहाँ से जीवित लौट आना क्या शशिधर (शिव) के लिए भी
सभव है ? अपने प्रभु का महान् कार्य बडे आनन्द के साथ जो शीघ्र ही सपन्न करता है,
वही उत्तम पुरुष है । प्रभु के कार्य में विघ्न पडने पर, विलव के साथ उसे पूरा करने-
वाला मध्यम श्रेणी का पुरुष है । प्रभु के बताये हुए कार्य से बचने की चेष्टा करनेवाला
तथा हीला-हवाला करनेवाला व्यक्ति दुस्सेवक है । इन तीनो में हनुमान् निस्सदेह श्रेष्ठ
व्यक्ति ही सिद्ध हुआ है । अनिलकुमार ने एक महान् कार्य को बडे हर्ष तथा तत्परता से
सपन्न किया है । अब उसका प्रत्युपकार, मैं किस प्रकार से कर सकूँगा । अब (प्रेम से)
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