रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ रंगनाथ रामायण
भी विचार न करके कि यह उपवन राजा का है, वे मनमानी कर रहे हैं । मैंने उन्हें
डाँट-डपटकर वाहर निकालने का प्रयत्न किया, तो उन्होंने मुझे मुष्टियो मे मारकर भगा
दिया है ।'
दधिमुख का विलाप सुनकर सुग्रीव अत्यत क्रुद्ध हो गया और उन वानरो को उचित
दड देने का विचार करने लगा । तब सारी परिस्थिति समझकर सतत-विजयी लक्ष्मण ने
सुग्रीव से कहा—'यदि अगद आदि महावीर तुम्हारी आज्ञा विना प्राप्त किये ही, निर्भय
होकर तुम्हारे वन में प्रवेश करके शहद पी रहे है, तो कदाचित् उन वाहुवलियो के द्वारा
रामचंद्रजी का कार्य सपन्न हुआ होगा । अन्यथा, वे इस प्रकार तुम्हारी आज्ञा की अवहेलना
करने का माहस कभी नहीं करेंगे । इसलिए तुम उन्हें शीघ्र यहाँ वुलाओ ।'
तब सूर्यपुत्र ने दधिमुख को देखकर कहा—'वे रामचंद्रजी का कार्य सपन्न
करके आये दीखते हैं, इसलिए उनके सभी अपराध क्षम्य हैं । तुम अपना दुख सहन कर
जाओ और उन्हें यहाँ वुला लाओ ।' सुग्रीव का आदेश पाकर वह उन वानरो के समीप
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