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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

( २४ )

महिमा बताना-४३३; १३७ रावण का तृतीय युद्ध के लिए प्रस्थान-४३५; १३८
वानरो के द्वारा खडगरोम आदि राक्षसो का वध-४३७, १३६ इन्द्र का मातलि के
द्वारा राम को रथ भेजना-४३८, १४० राम का रावण के बाणो का प्रतिवाण चलाना-
४४०, १४१ रावण का राम पर शूल चलाना-४४०, १४२ अगस्त्य के द्वारा
राम को आदित्यहृदय का उपदेश-४४१, १४३ राम-रावण का परस्पर दोषारोपण-
४४२; १४४ रावण की मूर्च्छा-४४३, १४५ रामका रावण के कर चरणो को खडित
करना-४४५, १४६ आग्नेय अस्त्र के प्रयोग से रामका रावण को शक्तिहीन कर
देना-४४७, १४७ ब्रह्मास्त्र से रावण का वध-४४८, १४८ विभीषण का शोक-
४४६, १४६ मृत रावण के निकट मदोदरी का आना-४४६, १५० मदोदरी का
विलाप-४५१; १५१ राम का विभीषण के द्वारा रावण की अंत्येष्टि कराना-४५३;
१५२ विभीषण का राजतिलक-४५४, १५३ हनुमान् का सीता को राम की विजय
का समाचार देना-४५४; १५४ राम के आदेश से विभीषण का सीता को लिवा
लाना-४५५; १५६ सीता का अग्नि-प्रवेश-४५७, १५७ सीता-परिग्रहण — ४५८;
१५८ दशरथ के दर्शन-४५६, १५६ देवताओ का अभिनन्दन-४६०, १६० पुष्पक-
आरोहण-४६१; १६१ श्रीराम का सीता को विभिन्न दृश्यो को दिखाकर समझाना-
४६२; १६२ राम के द्वारा शिवलिंग का प्रतिष्ठापन-४६३, १६३ श्रीराम का
सेतु की महिमा बताना-४६५; १६४ भरद्वाज मुनिका आतिथ्य-४६७, १६५ हनुमान्
का भरत को राघवो का कुशल-समाचार सुनाना-४६६, १६६ भरत-मिलाप-४७१,
१६७ अयोध्या में प्रवेश-४७३; १६८ राजतिलक-४७४; १६६ मित्रो को प्रीतिभोज
देना-४७५ ।