रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'हे कुमार, हे प्रिय अक्ष,, हे वीर, एक कपि के हाथो तुम्हें मरना पडा ! हाय, यह कैसी
विपरीत बात हुई !'
१९. इन्द्रजीत का हनुमान् को वन्दी बनाना
इस प्रकार, शोक-सतप्त होनेवाले पिता को देखकर इन्द्रजीत ने कहा—'हे देव, आप
इस प्रकार धैर्य खोकर दु खी क्यो होते हैं । मै अभी उस नीच वानर पर आक्रमण करता हूँ ।
या तो उसे युद्ध में अवश्य मार ही डालूँगा, या बडे पराक्रम के साथ उसे वदी
बनाकर आपके समक्ष उपस्थित करूँगा । आप शोक मत कीजिए ।'
अपने ज्येष्ठ पुत्र की इन बातो को सुनकर रावण को धीरज हुआ और वह कहने
लगा—'हे पुत्र, तुमने चिरकाल तक इन्द्र को वदी बनाकर रखा था । माया तथा शक्ति
में तुम प्रौढ हो, तुम्हारा पराक्रम मुझसे भी श्रेष्ठ है । इस पृथ्वी पर तुम्हारी समता कौन
कर सकता है ? फिर भी, उस वानरश्रेष्ठ को साधारण वीर मत समझो । सतत सावधान
रहते हुए अपने दिव्य बाणो के प्रभाव से तथा अपनी सहज शक्ति के प्रताप से विजय
प्राप्त करके लौटो ।'
पिता की आज्ञा पाकर मेघनाद अग्नि तथा सूर्य के समान दीप्तिमान् रथ पर आरूढ