रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसुन्दरकांड २३५
प्रहार किया, तो हनुमान् पृथ्वी पर गिर पड़ा। फिर तुरंत वह उठा और एक विशाल साल-
वृक्ष को उखाड़कर हुकार करते हुए उनकी ओर लपका और बड़े वेग मे उस वृक्ष को
घुमाकर उन राक्षसो पर प्रहार किया और एक ही प्रहार से उन्हें पृथ्वी पर गिरा दिया।
तब भासकर्ण तथा प्रघस नामक राक्षसो ने अनिलपुत्र पर आक्रमण किया और
अपने शूल तथा मुद्गरो की चोट से उसे व्याकुल कर दिया। उनके प्रहारो से
हनुमान् घायल हो गया और उसके अगो से रक्त बहने लगा। तब वायुपुत्र अत्यधिक क्रोधा-
वेश में आकर कुलपर्वत-सदृश एक विशाल पर्वत को उखाड़कर उन राक्षसो पर फेंका
कि राक्षस ऐसे चूर-चूर होकर गिर गये, जैसे घूस के द्वारा भीतर से खोखला बना दिये
जाने पर, ऊपर की धरती गिर जाती है।
इसके पश्चात् वायुपुत्र यमराज की भाँति राक्षस-सेना का सर्वनाश करने लगा।
हाथियो का हनन हुआ, तुरग तहस-नहस हुए, पदाति-सेना परास्त हुई, रथ ध्वस्त हुए,
शूर गिरे, महारथी मरे, सारथी दब गये, शस्त्रास्त्र चूर-चूर हो गये, महावत मारे गये,
घुड़-सवार गिर गये, छत्र झुक गये, ध्वजाएँ ध्वस्त हुई और रक्त की नदियाँ वह चली
तथा मास-खंडो से आकृष्ट हो बहुत-से भूत वहाँ एकत्रित हो गये। इस प्रकार पवन-
कुमार ने एक ही क्षण में सारी सेना का ध्वस किया और रण की आकाक्षा करते हुए
तोरण पर जा बैठा।
१७. अक्षयकुमार का हनुमान् पर आक्रमण करना
हतशेष राक्षस भागते हुए रावण के पास पहुँचे और उसे पाँचो अग्र सेनापतियो की
मृत्यु का समाचार सुनाया। तब राक्षसराज ने, रण-कौशल में निपुण, मन्मथाकार, परिष्कृत
विचारवाले, अक्षीण शौर्यवाले, भयंकर शूर तथा महावीर अक्षयकुमार को बुलाकर कहा—
'तुम जाकर बड़े यत्न के साथ उस वानर को युद्ध में मार डालो और उसका सिर काटकर
तोरण के स्तंभ पर लटका दो।'
पिता का आदेश मानकर अक्षयकुमार, शस्त्रास्त्रो से सुसज्जित तथा अपनी पताका
से अलकृत हो, उदित होनेवाले सूर्य की-सी काति मे शोभायमान होते हुए, आठ घोडे
जुते हुए रथ पर बैठकर शीघ्र गति से चला। उसके चलते समय पृथ्वी काँपने लगी, रथ
के चलने से उत्पन्न ध्वनि, घोडो की हिनहिनाहट, हाथियो की चिघाड, राक्षसो के हुकार,
तथा उस (अक्षयकुमार) के धनुष के टकार, इन सबकी सम्मिलित ध्वनियो से समस्त आकाश गूँजने
लगा। वहाँ पहुँचकर अक्षयकुमार