रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसुन्दरकाण्ड २३३
उन्होंने घेर लिया और उस पर श्रेष्ठ तथा दिव्य अस्त्रोंकी वर्षा करने लगे । तब पवन-
कुमार ने वडे साहस के साथ, वादलो से घिरे हुए इन्द्र के समान सुशोभित होते हुए अपने
अघटित पराक्रम से उन दैत्यो के अस्त्रो से अपने-आपको वचाते हुए, अपने नखाग्र, पैने
दाँत, चरण, कुहनी तथा करो से प्रहार करके तथा वडी-वडी शिलाओ तथा वृक्षो को
चारो ओर से वडे वेग से उन पर फेंककर उनको चूर चूर कर डाला । हाथियो पर सिंह
के समान उछलकर चढ गया और अपने कुटिल तथा भयकर नखाग्रो से उनके कुम्भस्थलो
को चीरकर मास तथा गजमुक्ताओ को विखेर दिया । फिर छलाँग मारनेवाले हिरणो की
भाँति शीघ्रगति से दौडनेवाले अश्वो को देखते-देखते निशेष कर दिया । जीव-जतुओ का
पारण करनेवाले यमराज की भाँति वडे मनोयोग से पदचर सेना को मटियामेट कर दिया ।
कुलपर्वतो पर आघात करके भयकर ध्वनि के साथ उनको भेदनेवाले वज्र के समान वह
रथो पर उछलकर चढ गया