रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 259, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिसी भी प्रकार यहाँ आयेंगे और आपको साथ लेकर अयोध्या जायेंगे । रावण रामके
द्वारा युद्ध में मारा जायगा । आपकी इच्छा पूर्ण होगी । पर हे माता, इतना विलव क्यो ?
चलिए, स्वय आपको अपनी पीठ पर लेकर, वडे यत्न से समुद्र को लाँघकर प्रात काल होते-
होते प्रभु के पास पहुँच जाऊँगा ।”
वायु-पुत्र के सद्गुणो से प्रसन्न होकर सीता बोली—“हे पवनसुत, तुम अवश्य ही
इस प्रकार करने की क्षमता रखते हो । सचमुच तुम्हारी शक्ति वैसी ही है । किन्तु,
हे अनघ, विवाह के दिन से अबतक लोकप्रभु, रामचन्द्र के सिवा अन्य पुरुष का स्पर्श
स्वप्न में भी मैने नही किया । यह नीच रावण मुझे यहाँ उठा लाया है, उसके स्पर्श का
दुख ही मुझे सतत सालता रहता है । उसने दुस्साहस के साथ बलात् मेरा स्पर्श किया ।
मै अन्य किसी पुरुषो के स्पर्श की कल्पना भी नही करती । तुम मेरे प्राणनाथ के विश्वास-
पात्र अनुचर हो । फिर भी, मै तुम्हारी पीठ पर बैठकर चलना नही चाहती । लोग कहेंगे
कि राम की पत्नी को धोखे से दैत्य उठा ले गया था और राम भी उसी प्रकार उसे
वापस ले आये, इसलिए यह उचित नही है । पहले एक बार चित्रकूट में रहते