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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

( २० )
५ कैकेयी के भवन में राम का दशरथ से भेंट करना—८२, ६ कौसल्या का दुख—८४;
७ लक्ष्मण का क्रोध और राम का समझाना—८५, ८ राम का कौसल्या
को धैर्य देना—८७, ९ राम का अभिषेक-भंग का वृत्तांत सीता को सुनाना—८८;
१० राम का सीता तथा लक्ष्मण को भी साथ चलने की अनुमति देना—६०, ११ राम-
लक्ष्मण का सम्पत्ति-दान—६१, १२ त्रिजटाख्य को राम का गायो का दान देना—६१;
१३ सीता-लक्ष्मणसहित रामका दशरथ के दर्शनार्थ जाना—६२, १४ कैकेयी पर वसिष्ठ
का क्रोध—६५, १५ राम का दशरथ को सांत्वना देना—६६, १६ सीता को सीख
देना—६६, १७ राम का वन-गमन—६७, १८ गुह से राम की भेंट—१००, १९
राम का गगा पार करके वन में प्रवेश करना—१०२, २० काकासुर-वृत्तान्त—१०३,
२१ सुमंत्र का अयोध्या पहुँचना—१०३, २२ दशरथ का कौसल्या को अपने शाप का
वृत्तांत सुनाना—१०४, २३ दशरथ का स्वर्गवास—१०८, २४ भरत का अयोध्या में
प्रवेश—११०, २५ भरत का कौसल्या के घर जाना—१११, २६ भरत का राम के
पास जाना—११३, २७ भरत का भरद्वाज के आश्रम में पहुँचना—११४, २८ भरत
की राम से भेंट—११६, २९ भरत का राम को दशरथ की मृत्यु का समाचार देना—११७,
३० श्रीराम को जाबालि का उपदेश—१२०, ३१ पादुका-दान—१२० ।
अरण्यकांड १२३-१७०
१ चित्रकूट से प्रस्थान—१२५, २ राम का दण्डक वन की यात्रा करना—
१२६, ३ विराध का वध—१२६, ४ श्रीराम का शरभंग के आश्रम में पहुँचना—१२७,
५ श्रीराम का सुनीक्षण मुनि के आश्रम में पहुँचना—१२८, ६ मदकर्णी का वृत्तांत—
१३०, ७ अगस्त्य से भेंट—१३०, ८ जटायु से मित्रता—१३२, ९ हेमंत-वर्णन—
१३२, १० जवुमालि का वृत्तांत—१३३, ११ शूर्पणखा का वृत्तांत—१३६; १२ खर-
दूषण का वध—१३६, १३ लका में अकपन तथा रावण का वार्त्तालाप—१४५;
१४ शूर्पणखा का रावण से दीनालाप—१४६, १५ रावण का पुन मारीच के पास
जाना—१४७, १६ मारीच का पुन उद्बोधन—१४८, १७ मारीच का माया-मृग के
रूप में आना—१४६, १८ राम का माया-मृग का पीछा करना—१५१, १९ भिक्षुक
के वेश में रावण का सीता के पास आना—१५३, २० जानकी का शोक—१५५,
२१ जटायु और रावण का युद्ध—१५६, २२ जानकी को अशोकवन में रखना—१५६,
२३ श्रीराम का दुख—१५६, २४ लक्ष्मण का राम को सांत्वना देना—१६३, २५
जटायु का अग्नि-संस्कार करना—१६५, २६ कबध का वध—१६६, २७ राम-लक्ष्मण
की शबरी से भेंट—१६७, २८ श्रीराम का ऋष्यमूक पर्वत पर पहुँचना—१६८।
किष्किंधाकांड १७१-२१०
१ पंपासर-दर्शन—१७३, २ हनुमान की राम से भेंट—१७५, ३ हनुमान् का
अपने जन्म का वृत्तांत सुनाना—१७६; ४ सुग्रीव का सीताके आभूषणो को देना—१७८,