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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 182, कुल 508 में से

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पृष्ठ 182

१५२ रंगनाथ रामायण

खड़े हो जाते, तब उनके पार्श्वभाग में ही दिखाई पड़ता और तुरंत छल करके दूर
हो जाता । जब राम तंग आकर उसपर बाण चलाने के लिए सन्नद्ध हो जाते, तब वह अदृश्य
हो जाता । इस प्रकार वह माया-मृग राम को थकाते हुए, वहाँ से दूर घने वन में जा
पहुँचा और उनकी आँखों से ओझल होने का यत्न करने लगा । अब राम समझ गये कि
वह माया-मृग है और मन-ही-मन कहने लगे—'दिखाई देकर अब कैसे बचोगे ?' उन्होंने
ब्रह्मास्त्र का संधान किया, और पर्वतों को कँपाते हुए, समुद्र को आंदोलित करते हुए, सभी
लोकों को भयभीत करते हुए और दिशाओं को थर्राते हुए, उस अस्त्र को मृग पर चलाया ।
वह माया-मृग अपना कपटरूप छोड़कर, असुर का दीर्घ आकार धारण किये हुए 'हाय
लक्ष्मण' का आर्तनाद से दिशाओं को गुँजाते हुए, प्राण छोड़कर पृथ्वी पर ऐसे गिरा, मानो
राक्षसों की लक्ष्मी ही नष्ट हो गई हो, रावण का ही सर्वनाश हुआ हो, अथवा लंकापुरी ही
विध्वस्त हो गई हो । उस माया-मृग को पृथ्वी पर गिरते देख,