रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअरण्यकांड १६३
धनुष के टुकड़े-टुकड़े कर दिये । रथ से विहीन होन से दूषण क्रोधोन्मत्त होकर भयंकर,
प्राणान्तक, विजयशील यम की गदा की समता रखनेवाले मुद्गर को घुमाते हुए राम
पर दौड़ा । तब राम ने दो तेज बाणों को चलाकर उसके दोनों हाथ काट डाले और एक
घातक तीर उसके हृदय में मारा । तब वह राक्षस पृथ्वी पर ऐसे गिर पड़ा, जैसे मत्तगज
दांतों के टूटने से ढेर होकर पृथ्वी पर गिरता है । उसको गिरा देखकर प्रमाथी, महा-
कपाल तथा स्थूलाक्ष नामक तीन दण्ड-नायकों ने परशु, कृपाण तथा भाला उनपर चलाये,
तो राम ने उनके अस्त्रों तथा उनके मस्तकों को एक-एक करके गिरा दिया ।
तब खर ने अपने बारह सेनापतियों को उत्तेजित किया । उन बारहौ सेनापतियों ने
अपने दुर्वार शौर्य से वीर राघव पर आक्रमण किया और अलग-अलग उनसे युद्ध करने
लगे । तब राम ने वज्र की धार के समान पैने तथा भयंकर बाणों के प्रयोग से अपनी
शक्ति दरसाते हुए श्येनगामी का अंत कर डाला, कालकार्मुक का वध किया, करवीरने