रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 169, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ेंअरण्यकांड १३९
आ रही हैं। अब इससे परिहास छोड़कर, इसे दण्ड दो।' तब लक्ष्मण ने बाँबी से
निकलनेवाले विष-ज्वालाओ से युक्त साँप-सा अपना खड्ग म्यान से निकाला और उस
राक्षसी की नाक और कान काट लिये। तब वह रोती-कलपती, विवश हो, टूटे हुए शृंगवाले
लाल पर्वत के सदृश (नाक-कान से) रक्त बहाती हुई, वहाँ से भाग गई। वहाँ
से भागकर वह चतुर्दश सहस्र श्रेष्ठ निशाचरो के निलय, खर के निवास-स्थान में पहुँची।
१२ खर-दूषण का वध
खर ने जब उस (शूर्पणखा)का रूप देखा, तब वह डर गया और पूछा--'किसने
निर्भय होकर तुम्हारा रूप ऐसा विकृत कर दिया है ? काले नाग को जानकर भी किसने
उसे पैर से कुचला हैं ? किसने मृत्यु को इस प्रकार छेड़ा है ? मुझे उसका नाम बताओ।
में शीघ्र उसका रक्त और मास तुम्हें ला दूँगा। इस प्रकार प्रश्नो की वर्षा करनेवाले
खर को देखकर वह स्त्री भर्राई हुई विकृत आवाज में रोती हुई, अत्यधिक लज्जा से सर
झुकाये हुए, इस प्रकार कहने लगी--'वन में जहाँ मैं रहती हूँ, मेरा पुत्र सूर्य के प्रति
अत्यत निष्ठा से तप कर रहा था। तब मुनि-वेशधारी अत्यत साहसी, मोहनाकार राम-
लक्ष्मण नाम के राजकुमारो ने विना भय के उसका वध कर डाला। मैंने अपने पुत्र की
अंत्येष्टि-क्रियाएँ की और वन में रहनेवाले उन सुन्दर आकारवाले राजकुमारो के पास
गई और उनपर मोहित हो गई। उन्होने अपनी अमित शक्ति के प्रताप से मेरी ऐसी
दुर्गति कर दी हैं। मैं दुखी होती हुई तुम्हारे पास आई हूँ। तुम तुरत उनके पास जाओ
और अपनी पूरी शक्ति लगाकर उनका वध करके उनका मास ला दो। इस तरह मेरे
हृदय को शांति पहुँचाओ।'
इन बातो को सुनकर खर ने कहा--'इस छोटी-सी बात के लिए मेरे आने की
आवश्यकता ही क्या है ? उनकी शक्ति ही कितनी है ? में अपने अनुचरो को (तुम्हारे
साथ) भेजूँगा। उन्हें ले जाओ। इस प्रकार कहकर उसने यम के-से उग्र तेजवाले (भटो)
को बुलाकर कहा--'तुम इस शूर्पणखा के साथ जाओ और उन मानवो का वध करके
मेरी बहन शूर्पणखा को उनका रक्त पिला दो।'
वे राक्षस वायु के साथ आनेवाले दुर्वार मेघो के समान, बिजलियो के-से शूल
घुमाते हुए राम और लक्ष्मण-रूपी सूर्य-चन्द्रो पर आक्रमण करने लगे, और घोर गर्जन करने लगे।
तब राम ने अपने दीप्तिमान् धनुष तथा अन्य आयुधो से युक्त हो उनका सामना
किया। उन्होने राक्षसो से फेंकी हुई बिजली तथा शूलो को अपने शस्त्रो से काटकर पृथ्वी
पर गिरा दिया। उसके पश्चात् (राम ने) भयंकर वज्र-से बाणो से उनके कठो को काट
डाला और तब उनके सिर पके हुए फलो के समान गिर पडे और वे अनुपम बाणो के
आघात से सीधी शिलाओ के समान पृथ्वी पर लुढक पडे।
तब शूर्पणखा अत्यत वेग से भागकर सभी लोको को भयभीत करनेवाले खर से
उन राक्षसो की मृत्यु का तथा रघुराम की महिमा-समन्वित युद्ध का समाचार कहा।
आहुति के पडने से उत्तेजित होकर भभक उठनेवाली अग्नि के समान क्रुद्ध होकर खर
अत्यधिक आवेश से भरे दूषण, त्रिशिर आदि चौदह सहस्र बलशाली राक्षस वीरो को साथ