रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 508 में से
संदर्भ में पढ़ें८२ रंगनाथ रामायण
आठ कन्याएँ, हेम ऋक्ष, औदुम्बर (गूलर) की पीठिका, गङ्गादि तीर्थों का जल तथा अन्य मंगल-
वस्तुओ को मँगाया, श्रेष्ठ रत्नाभूषणो को वेद-विधि से दान कराया, एक लाख कन्याएँ,
एक लाख गायें, एक लाख ऊँट मँगाये, जप आदि कराया, गाति-पाठ कराया, हवन आदि
सम्पन्न किया और शुभ मुहूर्त को आसन्न देखकर राजा को लिवा लाने के लिए सुमंत्र को
भेजा ।
सुमंत्र कैकेयी के अंतःपुर में गया और शयन-कक्ष के किवाड़ के पास खड़े होकर
निवेदन किया —'हे देव ! सूर्योदय हो रहा है । श्रीराम के राज-तिलक का मुहूर्त निकट
आ रहा है । अतः आप शीघ्र पधारें । हे राजन् ! अभिषेक-मण्डप में मुनि, राजा तथा
अन्य महात्मा उपस्थित हैं । पुरजन विबुध तथा नातेदार आपके आगमन की प्रतीक्षा कर
रहे हैं ।'
इन बातो को सुनकर राजा सोचने लगे—'अब तुम भी मुझे दुःख पहुँचाने के लिए
आये हो, मानो अब तक मुझे कोई दुख ही नही है ।' यो सोचकर वे चुपचाप लेटे रहे ।
तब कैकेयी ने सुमंत्र से कहा—'तुम शीघ्र जाकर राम को यहाँ ले आओ । यह राजा
का आदेश है ।' तुरत सुमंत्र वहाँ से चला गया ।
सुमंत्र कैकेयी के अंतःपुर से उस राज-मार्ग से जाने लगा, जो शीतल चंदन-जल से
सिंचित आँगन, ध्वजाओ से अलंकृत गृहो, चंदन, अगरु तथा धूप से सुगंधित वायु, मंद पवन
से डोलनेवाली पुष्प-मालाओ, प्रत्येक गृहद्वार पर स्थापित कदली-वृक्षो, अतुलित मणि-तोरणो
और उत्साह-पूर्ण पुरजनो से भरा हुआ, दुर्गम दीख रहा था । उस मार्ग से होकर वह
रामचन्द्र के उस अंतःपुर के पास जा पहुँचा, जो इन्द्र-भवन का भी परिहास करता हुआ
कुवेर के महल के समान अतुल वैभव-लक्ष्मी से समन्वित था । वहाँ पहुँचकर उसने राम
को अपने आने का समाचार कहला भेजा और उनकी अनुमति पाकर भीतर गया । वहाँ
उसने तारा से सुशोभित शशि के समान दीखनेवाले, सीता से युक्त रामचंद्र को देखकर
उन्हें प्रणाम किया और कहा—'हे देव ! महाराज दशरथ देवी कैकेयी के गृह में आपको
लिवा लाने के लिए मुझे भेजा है ।'
राम मुस्कुराते हुए जानकी को वही छोड़कर लक्ष्मण के साथ रथ पर आरूढ़ होकर
कैकेयी के महल की ओर रवाना हुए । उनके पीछे चतुरगिणी सेना चली । अतुल वाद्य
बजने लगे, वन्दीजन स्तुति-पाठ करने लगे और सुमङ्गलियाँ पुष्प-वर्षा करने लगीं । नगर-
निवासी जयजयकार करने लगे । इस प्रकार, वे बड़े वेग से राजा के अंत पुर के पास जा
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