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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 128 में से

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पृष्ठ 48

36 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
आया। और अतिशीघ्र अपने ठहरने का स्थान बदल लिया। उस समय हम लोगों
के पास दो राइफलें, चार रिवाल्वर तथा दो पिस्तौल खरीदे हुए मौजूद थे। किसी
प्रकार उस खुफिया पुलिस वाले को एक कारीगर से, जहाँ पर हम अपने हथियारों
की मरम्मत कराते थे, मालूम हुआ कि हम में से एक व्यक्ति उसी दिन जाने
वाला था, उसने चारों ओर स्टेशन पर तार दिलवाए। रेलगाड़ियों की तलाशी ली
गई। पर पुलिस की असावधानी के कारण हम बाल-बाल बच गए।
रुपये की चपत बुरी होती है। एक पुलिस सुपरिटेंडेंट के पास एक राइफल
थी। मालूम हुआ वह बेचते हैं। हम लोग पहुँचे। अपने आप को रियासत का
रहने वाला बतलाया। उन्होंने निश्चय करने के लिए बहुत से प्रश्न पूछे, क्योंकि
हम लड़के तो थे ही। पुलिस सुपरिटेंडेंट पेंशनभोगी मुसलमान थे। हमारी बातों पर
उन्हें पूर्ण विश्वास न हुआ। कहा कि अपने थानेदार से लिखा लाओ कि वह तुम्हें
जानता है। मैं गया। जिस स्थान का रहने वाला बताया था, वहाँ के थानेदार का
नाम मालूम किया, और एक-दो जमींदारों के नाम मालूम किए। फिर एक पत्र
लिखा कि मैं उस स्थान के रहने वाले अमुक जमींदार का पुत्र हूँ और वे लोग
मुझे भली-भाँति जानते हैं। उसी पत्र पर जमींदारों के हिन्दी में और पुलिस के
दारोगा के अंग्रेजी में हस्ताक्षर बना, पत्र ले जाकर पुलिस कप्तान को दिया। बड़े
गौर से देखने के बाद वह बोले, "मैं थाने में दर्याफ्त कर लूँ। तुम्हें भी थाने
चलकर इत्तला देनी होगी कि राइफल खरीद रहे हैं।" हम लोगों ने कहा कि
हमने आपके इत्मीनान के लिए इतनी मुसीबत झेली, दस-बारह रुपये खर्च किए,
अगर अब भी विश्वास न हो तो मजबूरी है। हम पुलिस में नहीं जाएँगे। राइफल
के दाम लिस्ट में 180 रुपये लिखे थे, वह 250 रुपये माँगते थे, साथ में दो सौ
कारतूस भी दे रहे थे। कारतूस भरने का सामान भी देते थे, जो लगभग 50
रुपये का होता था। इस प्रकार पुरानी राइफल के नई के समान दाम माँगते थे।
हम लोग भी 250 रुपये देते थे। पुलिस कप्तान ने भी सोचा कि पूरे दाम मिल
रहे हैं। स्वयं वृद्ध हो चुके थे। कोई पुत्र भी नहीं था। अतएव 250 रुपये लेकर