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सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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स्वदेश-प्रेम 37
राइफल दे दी। पुलिस में कुछ पूछने न गए। उन्हीं दिनों राज्य के एक उच्च
पदाधिकारी के नौकर से मिलकर उनके यहाँ से रिवाल्वर चोरी कराया। जिसके
दाम लिस्ट में 75 रुपये थे, उसे 100 रुपये में खरीदा। एक माउजर पिस्तौल भी
चोरी कराया, जिसके दांम लिस्ट में उस समय 200 रुपये थे। हमें माउजर
पिस्तौल की प्राप्ति की बड़ी इच्छा थी। बड़े भारी प्रयत्न के बाद यह माउजर
पिस्तौल मिला, जिसका मूल्य 300 रुपये देना पड़ा। कारतूस एक भी न मिला।
हमारे पुराने मित्र कबाड़ी महोदय के पास माउजर पिस्तौल के पचास कारतूस पड़े
थे। उन्होंने बड़ा काम दिया। हममें से किसी ने भी पहले माउजर पिस्तौल देखा
भी न था। कुछ न समझ सके कि कैसे प्रयोग किया जाता है। बड़े कठिन
परिश्रम से उसका प्रयोग समझ में आया।
हमने तीन राइफलें, एक बारह बोर की दोनाली कारतूसी बंदूक, दो टोपीदार
बंदूकें, तीन टोपीदार रिवाल्वर और पाँच कारतूसी रिवाल्वर खरीदे। प्रत्येक हथियार
के साथ पचास या सौ कारतूस भी ले लिए। इन सब में लगभग चार हजार रुपये
व्यय हुए। कुछ कटार तथा तलवारें इत्यादि भी खरीदीं थीं।
मैनपुरी षड्यंत्र
इधर तो हम लोग अपने कार्य में व्यस्त थे, उधर मैनपुरी के एक सदस्य पर
लीडरी का भूत सवार हुआ। उन्होंने अपना पृथक संगठन किया। कुछ अस्त्र-शस्त्र
भी एकत्रित किए। धन की कमी की पूर्ति के लिए एक सदस्य से कहा कि अपने
किसी परिवार के सदस्य के यहाँ डाका डलवाओ। उस सदस्य ने कोई उत्तर न
दिया। उसे आज्ञापत्र दिया गया और मार डालने की धमकी दी गई। वह पुलिस
के पास गया। मामला खुला। मैनपुरी में धर-पकड़ शुरू हो गई। हम लोगों को
भी समाचार मिला। दिल्ली में कांग्रेस का अधिवेशन होने वाला था। विचार किया
गया कि "अमेरिका को स्वाधीनता कैसे मिली" नामक पुस्तक, जो यू.पी. सरकार
ने जब्त कर ली थी, कांग्रेस के अवसर पर बेच दी जाए। कांग्रेस के अधिवेशन