सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 38

26 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
गई, और, बच्चे नौकर-नौकरानियों के हाथ से बच गए तो मुहल्ले की गंदगी से
बचना बड़ा कठिन है। रहे-सहे स्कूल में पहुँचकर पारंगत हो जाते हैं। कालिज
पहुँचते-पहुँचते आजकल के नवयुवकों के सोलहों संस्कार हो जाते हैं। कालिज में
पहुँचकर ये लोग समाचार-पत्रों में दिए हुए औषधियों के विज्ञापन देख-देखकर
दवाइयों को मँगा-मँगाकर धन नष्ट करना आरंभ करते हैं। 95 प्रतिशत की आँखें
खराब हो जाती हैं। कुछ को शारीरिक दुर्बलता तथा कुछ को फैशन के विचार से
ऐनक लगाने की बुरी आदत पड़ जाती है। सौन्दर्योपासना तो उनकी रग-रग में
कूट-कूट कर भर जाती है। शायद ही कोई विद्यार्थी ऐसा हो जिसकी प्रेम कथाएँ
प्रचलित न हों। ऐसी अजीब-अजीब बातें सुनने में आती हैं कि जिनका उल्लेख
करने से भी ग्लानि होती है। यदि कोई विद्यार्थी सच्चरित्र बनने का प्रयत्न भी
करता है और स्कूल या कालिज जीवन में उसे कुछ अच्छी शिक्षा भी मिल
जाती है, तो परिस्थितियाँ जिनमें उसे निर्वाह करना पड़ता है, उसे सुधरने नहीं
देतीं। वे विचारते हैं कि थोड़ा-सा इस जीवन का आनंद ले लें, यदि कुछ
खराबी पैदा हो गई तो दवाई खाकर पौष्टिक पदार्थों का सेवन करके दूर कर
लेंगे। यह उनकी बड़ी भारी भूल है। अंग्रेजी की कहावत है "ओनली फॉर वन्स
एंड फॉर एवर"।
तात्पर्य यह है कि यदि एक समय कोई बात पैदा हुई, मानो सदा के लिए
रास्ता खुल गया। दवाइयाँ कोई लाभ नहीं पहुँचातीं। अंडों का जूस, मछली के
तेल, मांस आदि पदार्थ भी व्यर्थ सिद्ध होते हैं। सबसे आवश्यक बात चरित्र
सुधारना ही होती है। विद्यार्थियों तथा उनके अध्यापकों के लिए उचित है कि वे
देश की दुर्दशा पर दया करके अपने चरित्र को सुधारने का प्रयत्न करें। सार में
ब्रह्मचर्य ही संसारी शक्तियों का मूल है, बिना ब्रह्मचर्य-व्रत पालन किए मनुष्य-जीवन
नितांत शुष्क तथा नीरस प्रतीत होता है। विद्या, बल और बुद्धि सब ब्रह्मचर्य के
प्रताप से ही प्राप्त होते हैं। संसार में जितने बड़े आदमी हुए हैं, उनमें से
अधिकतर ब्रह्मचर्य-व्रत के प्रताप से ही बड़े बने और सैकड़ों-हजारों वर्ष बाद भी