रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआत्म-चरित्र 25
'नींद निसारी मीच की उठ्ठ 'कबिरा' जाग।
और रसायन त्याग के नाम रसायन चाख।। 3।।
चलना है रहना नहीं चलना बिसयें बीस।
'कबिरा' ऐसे सुहाग पर कौन बँधावे सीस।। 4।।
अपने-अपने चोर को सब कोई डारे मारि।
मेरा चोर जो मोहिं मिले सर्बस डारूँ वारि।। 5।।
कहे सुने की है नहीं देखा देखी बात।
दूल्हा दुल्हिन मिलि गए सूनी परी बरात।। 6।।
नैनन की करि कोठरी पुतरी पलंग बिछाय।
पलकन की चिक डारि के पीतम लेह रिझाय।। 7।।
प्रेम पियाला जो पिये सीस दच्छिना देय।
लोभी सीस न दै सके, नाम प्रेम का लेय।। 8।।
सीस उतारे भुइँ धरै, तापे राखै पाँव।
दास 'कबिरा' यूँ कहै ऐसा होय तो आव।। 9।।
निन्दक नियरे राखिये आँगन कुटी छबाय।
बिन पानी साबुन उज्ज्वल करे सुभाय।। 10।।
ब्रह्मचर्य-व्रत का पालन
वर्तमान समय में इस देश की कुछ ऐसी दुर्दशा हो रही है कि जितने धनी
तथा गणमान्य व्यक्ति हैं, उनमें 99 प्रतिशत ऐसे हैं जो अपनी संतान-रूपी अमूल्य
धन-राशि को अपने नौकर तथा नौकरानियों के हाथ में सौंप देते हैं। उनकी जैसी
इच्छा हो, वे उन्हें बनावें। मध्यम श्रेणी के व्यक्ति भी अपने व्यवसाय तथा नौकरी
इत्यादि में फँसे रहने के कारण संतान की ओर अधिक ध्यान नहीं दे सकते।
सस्ता कामचलाऊ नौकर या नौकरानी रखते हैं और उन्हीं पर बाल-बच्चों का भार
सौंप देते हैं, वे नौकर बच्चों को नष्ट करते हैं। यदि कुछ भगवान की दया हो