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सर्वकोश
रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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आत्म-चरित्र 27
उनका यशगान करके मनुष्य अपने आपको कृतार्थ करते हैं। ब्रह्मचर्य की महिमा
यदि जानना हो तो परशुराम, राम, लक्ष्मण, कृष्ण, भीष्म, ईसा, मेजिनी, बंदा,
रामकृष्ण, दयानंद तथा राममूर्ति की जीवनियों का अध्ययन करो।
जिन विद्यार्थियों को बाल्यावस्था में कोई बुरी आदत पड़ जाती है, या जो
बुरी संगत में पड़कर अपना आचरण बिगाड़ लेते हैं और फिर अच्छी शिक्षा पाने
पर आचरण सुधारने का प्रयत्न करते हैं, परंतु सफल मनोरथ नहीं होते, उन्हें भी
निराश नहीं होना चाहिए। मनुष्य-जीवन अभ्यासों का एक समूह है। मनुष्य के
मन में भिन्न-भिन्न प्रकार के अनेक विचार तथा भाव उत्पन्न होते रहते हैं। उनमें
जो उसे रुचिकर होते हैं, वे प्रथम कार्य-रूप में परिणत होते हैं। क्रिया के
बार-बार होने से ऐच्छिक भाव निकल जाता है और उसमें तात्कालिक प्रेरणा उत्पन्न
हो जाती है। इन तात्कालिक प्रेरक क्रियाओं को, जो पुनरावृत्ति का फल है,
"अभ्यास" कहते हैं। मानवी चरित्र इन्हीं अभ्यासों द्वारा बनता है। अभ्यास से
तात्पर्य आदत, स्वभाव, बान है। अभ्यास अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के होते हैं।
यदि हमारे मन में निरंतर अच्छे विचार उत्पन्न हों, तो उनका फल अच्छे अभ्यास
होंगे और यदि मन बुरे विचारों में लिप्त रहे, तो निश्चय ही अभ्यास बुरे होंगे।
मन इच्छाओं का केन्द्र है। इन्हीं की पूर्ति के लिए मनुष्य को प्रयत्न करना पड़ता
है। अभ्यासों के बनने में पैतृक संस्कार, अर्थात माता-पिता के अभ्यासों के
अनुसार अनुकरण ही बच्चों के अभ्यास का सहायक होता है। दूसरे, जैसी
परिस्थितियों में निवास होता है, वैसे ही अभ्यास भी पड़ते हैं। तीसरे, प्रयत्न से
भी अभ्यासों का निर्माण होता है। यह शक्ति इतनी प्रबल हो सकती है कि इसके
द्वारा मनुष्य पैतृक संसार तथा परिस्थितियों को भी जीत सकता है। हमारे जीवन
का प्रत्येक कार्य अभ्यासों के अधीन है। यदि अभ्यासों द्वारा हमें कार्य में सुगमता
न प्रतीत होती, तो हमारा जीवन बड़ा दुखमय प्रतीत होता। लिखने का अभ्यास,
वस्त्र पहनना, पठन-पाठन इत्यादि इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। यदि हमें प्रारंभिक
समय की भाँति सदैव सावधानी से काम लेना हो, तो कितनी कठिनाई प्रतीत हो।